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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: आबादी को बढ़ने से रोकने की जरूरत

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: December 7, 2020 09:13 IST

तमाम कोशिशों के बावजूद भारत की जनसंख्या में कमी लाने के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे हैं। यदि यही स्थिति कायम रही तो भारत जनसंख्या के मामले में बहुत जल्द चीन को पीछे छोड़ देगा।

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ठळक मुद्देभारत की आबादी पर नियंत्रण में तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं मिली है बहुत सफलताचीन ने सख्त नीति के बाद जनसंख्या पर नियंत्रण करने में सफलता पाई है, भारत को भी नई योजनाओं की जरूरतभारत में 'दो हम और हमारे दो’ के नारे को कानूनी रूप देने की भी जरूरत है

यदि भारत में जनसंख्या की रफ्तार जो आजकल है, वह बनी रही तो कुछ ही वर्षो में वह चीन को पीछे छोड़ देगा. इस समय चीन से सिर्फ तीन-चार करोड़ लोग ही हमारे यहां कम हैं. भारत की आबादी इस वक्त एक अरब 40 करोड़ के आसपास है. चीन ने यदि कई वर्षो तक हर परिवार पर एक बच्चे का प्रतिबंध नहीं लगाया होता तो आज चीन की आबादी शायद दो अरब तक पहुंच जाती. 

अब से 60-70 साल पहले हर चीनी परिवार में प्राय: पांच-छह बच्चे हुआ करते थे. भारत से भी ज्यादा गरीबी चीन में थी लेकिन चीन ने आबादी की बढ़त पर सख्ती की, उसके कारण उसकी अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार हुआ. लेकिन आश्चर्य है कि भारत की सरकारों का इस मुद्दे पर ध्यान नहीं है.

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मुद्दे पर थोड़ी सजगता दिखाई थी और नसबंदी अभियान शुरू किया था लेकिन संजय गांधी के अति उत्साह और कुछ ज्यादतियों के कारण वह हाशिए पर चला गया. आपातकाल ने उसे और भी बदनाम कर दिया. इस वक्त दुनिया में जनसंख्या की बाढ़ जिन देशों में सबसे ज्यादा है, उनमें भारत अग्रणी है. 

यह एकदम सही समय है जब हम आबादी को बढ़ने से रोकें. तो सरकार क्या-क्या करे? पहला, जब वह लोगों को कोरोना का टीका लगाए तो मुफ्त में नसबंदी का भी ऐलान करे. वह अनिवार्य न हो. हां, कुछ प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं. जिनके एक या दो बच्चे हों, वे स्वेच्छा से टीका लगवाएं. दूसरा, ‘दो हम और हमारे दो’ का नारा घर-घर में गुंजा दिया जाए. 

इसे कानूनी रूप भी दिया जाए. जो दो से ज्यादा बच्चे पैदा करें, उन्हें सरकारी नौकरियों, संसद और विधानसभा की उम्मीदवारी और कई शासकीय सुविधाओं से वंचित किया जाए.

मेरा यह सुझाव कठोर तो लगता है लेकिन इससे देश का इतना भला होगा कि जो प्रधानमंत्नी इसे लागू करेगा, उसका दशकों तक भारत की जनता आभार मानेगी. इस नियम को लागू करने का विरोध वे जातिवादी और सांप्रदायिक लोग जरूर करेंगे, जो योग्यता-बल और चरित्न-बल के बजाय संख्याबल के आधार पर ही अपनी राजनीति चलाते हैं लेकिन व्यापक जन-समर्थन के आगे उनकी बोलती बंद हो जाएगी.

टॅग्स :चीनइंदिरा गाँधी
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