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छात्रा 3 साल के जीएनएम कोर्स के दौरान विवाह करती है, तो नामांकन रद्द?, स्कूल प्रशासन ने परिसर की दीवारों पर चस्पा किया नोटिस

By एस पी सिन्हा | Updated: April 17, 2026 17:40 IST

स्कूल की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

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ठळक मुद्दे चस्पा कर साफ कर दिया है कि छात्राओं के लिए पढ़ाई के दौरान शादी करना वर्जित है।नियम केवल नए सत्र के लिए ही नहीं, बल्कि वर्तमान में शिक्षा ग्रहण कर रही सभी छात्राओं पर लागू होगा। स्पष्ट किया कि यह कोई नया या व्यक्तिगत निर्णय नहीं है।

पटनाः बिहार के गोपालगंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां के हथुआ स्थित जीएनएम स्कूल की छात्राओं को पढ़ाई के दौरान शादी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। स्कूल प्रशासन ने परिसर की दीवारों पर नोटिस चस्पा कर साफ कर दिया है कि छात्राओं के लिए पढ़ाई के दौरान शादी करना वर्जित है।

इस आदेश ने स्कूल में पढ़ रही छात्राओं के बीच हलचल मचा दी है, क्योंकि अब उन्हें अपने करियर और वैवाहिक जीवन के बीच एक कठिन चुनाव करना होगा। स्कूल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई छात्रा तीन साल के जीएनएम कोर्स के दौरान विवाह करती है, तो उसका नामांकन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। 

यह नियम केवल नए सत्र के लिए ही नहीं, बल्कि वर्तमान में शिक्षा ग्रहण कर रही सभी छात्राओं पर लागू होगा। इस सख्त नियम के कारण छात्राएं अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति में हैं। स्कूल की प्राचार्या मानसी सिंह ने इस फैसले का बचाव करते हुए इसे विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नया या व्यक्तिगत निर्णय नहीं है। नामांकन के समय ही सभी छात्राओं से एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं, जिसमें वे यह वचन देती हैं कि पाठ्यक्रम पूरा होने तक वे अविवाहित रहेंगी। प्राचार्या के अनुसार, नर्सिंग एक आवासीय और गहन प्रशिक्षण वाला कोर्स है, जिसमें शादी के बाद छात्राओं की एकाग्रता और उपस्थिति प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन का तर्क है कि नर्सिंग की पढ़ाई में हॉस्टल में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होता है। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण छात्राएं परिसर में रहकर पूरी निष्ठा से काम नहीं कर पातीं। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल जीएनएम ही नहीं, बल्कि एएनएम संस्थानों में भी प्रभावी है।

इस फैसले से छात्राएं असमंजस और चिंता की स्थिति में हैं। हालांकि इस फैसले के बाद छात्राओं के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ छात्राएं इसे उनके व्यक्तिगत अधिकारों में हस्तक्षेप मान रही हैं, तो कुछ इसे पढ़ाई के लिए जरूरी अनुशासन बता रही हैं। फिलहाल, यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

टॅग्स :बिहारSchool Education
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