नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी गई ट्रांजिट जमानत पर रोक हटाने से इनकार कर दिया। खेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के खिलाफ टिप्पणी के मामले में गुवाहाटी में एक मुकदमे का सामना कर रहे हैं। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ के इस फैसले के बाद भी खेड़ा को असम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में तुरंत अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की छूट दी।
साथ ही हाई कोर्ट को इस सुनवाई से प्रभावित न होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने खेड़ा को गलत दस्तावेज, यानी गलत आधार कार्ड जमा करने के लिए फटकार भी लगाई। लेकिन कोर्ट ने मंगलवार तक सुरक्षा की मांग को खारिज कर दिया। खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने कहा कि गुवाहाटी हाई कोर्ट में याचिका सोमवार को दायर की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले में 20 अप्रैल तक गिरफ्तारी से संरक्षण देने का अनुरोध किया था।
शीर्ष अदालत ने खेड़ा से कहा कि वह इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए असम की सक्षम अदालत का रुख करें। उसने स्पष्ट किया कि राज्य की अदालत खेड़ा की याचिका पर बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी (यदि कोई हो) पर ध्यान दिए सुनवाई करेगी, चाहे वह इस न्यायालय द्वारा की गई हो या तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा।
भगोड़े की तरह छिप रहे हैं: न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा का पवन खेड़ा पर वार
उच्चतम न्यायालय द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़े एक मामले में संभावित दंडात्मक कार्रवाई से पवन खेड़ा को सुरक्षा प्रदान करने से शुक्रवार को इनकार करने और उन्हें राज्य (असम) की किसी सक्षम अदालत से राहत मांगने के लिए कहने के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर अपना हमला तेज कर दिया। सत्ताधारी पार्टी ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश ने खेड़ा द्वारा चलाए जा रहे “बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित” अभियान का पर्दाफाश किया है।