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नक्सल मोर्चे के ‘सी-60’ जवानों को मिलेगा खास सेवा पदक?, महाराष्ट्र सरकार का फैसला, जंगल में लड़नेवालों को अब मिलेगा सम्मान

By फहीम ख़ान | Updated: April 17, 2026 12:39 IST

पदक पाने के लिए सेवा रिकॉर्ड बेदाग होना चाहिए. किसी भी तरह की जांच या मामला लंबित नहीं होना चाहिए. साथ ही सी-60 में तय अवधि तक सेवा जरूरी है.

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ठळक मुद्दे दो साल और कर्मचारियों के लिए तीन साल. हर साल महाराष्ट्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन पदकों की घोषणा होगी. जवानों ने कठिन परिस्थितियों में रहकर जो साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा दिखाई है, वह वास्तव में सराहनीय है.ड्यूटी निभा रहे सी-60 के जवानों और अधिकारियों को यह सम्मान दिए जाने से बेहद खुशी हो रही है.

नागपुर: घने जंगलों में जान जोखिम में डालकर नक्सलियों से मुकाबला करने वाले पुलिस जवानों के लिए अब महाराष्ट्र राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गढ़चिरोली और गोंदिया जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात विशेष अभियान दल सी-60 के अधिकारियों और कर्मचारियों को “सी-60 सेवा पदक” से सम्मानित किया जाएगा. गृह विभाग ने शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को इसका शासन निर्णय भी जारी कर दिया है. यह पदक उन जवानों को मिलेगा, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में साहस, रणनीति और समर्पण के साथ उल्लेखनीय काम किया है. सरकार का मानना है कि कठिन हालात में काम करने वाले इन जवानों का हौसला बढ़ाना जरूरी है. पदक पाने के लिए सेवा रिकॉर्ड बेदाग होना चाहिए. किसी भी तरह की जांच या मामला लंबित नहीं होना चाहिए. साथ ही सी-60 में तय अवधि तक सेवा जरूरी है,

अधिकारियों के लिए कम से कम दो साल और कर्मचारियों के लिए तीन साल. हर साल महाराष्ट्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन पदकों की घोषणा होगी. शुरुआत के दो साल में हर साल 100 जवानों को यह सम्मान मिलेगा, बाद में संख्या पात्रता के आधार पर तय की जाएगी. नक्सल मोर्चे पर सी-60 की भूमिका हमेशा अहम रही है. अब सरकार के इस फैसले से जंगल में लड़ने वाले इन साइलेंट हीरोज को एक नई पहचान और सम्मान मिलने जा रहा है.

सी-60 के जवानों को मिला उनका हक

विशेष पुलिस महानिरीक्षक, नागपुर संदीप पाटिल ने कहा कि लंबे समय से नक्सल प्रभावित जंगलों में लगातार जोखिम उठाकर ड्यूटी निभा रहे सी-60 के जवानों और अधिकारियों को यह सम्मान दिए जाने से बेहद खुशी हो रही है. महाराष्ट्र पुलिस के इस विशेष दल में कार्यरत अधिकारी और जवानों ने कठिन परिस्थितियों में रहकर जो साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा दिखाई है, वह वास्तव में सराहनीय है.

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