लाइव न्यूज़ :

लाल कृष्ण आडवाणी पर बोलने वाले राहुल गांधी सीताराम केसरी को क्यों भूल जाते हैं?

By विकास कुमार | Updated: April 6, 2019 20:39 IST

राहुल गांधी जब यह बोल रहे हैं कि आडवाणी की क्या दुर्गति की गई तो फिर सीताराम केसरी को क्यों भूल जाते हैं? कैसे सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें मुख्यालय से उठा कर बाहर फ़ेंक दिया था.

Open in App

राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' नारे के धार को कम करते हुए नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है. बीते दिन अपने एक भाषण में उन्होंने कहा कि मोदी ने आडवाणी को मंच से जूता मार कर उतार दिया. मकसद साफ था कि लाल कृष्ण आडवाणी के जरिये पीएम को आईना दिखाया जाए. और इसके जरिये बीजेपी के कार्यकर्ताओं तक ये सन्देश पहुंचाया जाए कि मोदी किस स्तर के तानाशाह हैं. नरेन्द्र मोदी को राजनीतिक मर्यादा सिखाने की कोशिश अमर्यादित तरीके से की गई. 

मर्यादाओं की बलि 

गांधीनगर से इस बार लाल कृष्ण आडवाणी को टिकट नहीं मिलने के बाद मीडिया में इसकी खूब चर्चा हुई थी और तमाम नेताओं ने पीएम मोदी को घेरा. लेकिन राहुल गांधी ने जिस अंदाज में आडवाणी को लेकर टिप्पणी की है उससे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इतनी आहत हुईं कि उन्होंने राहुल गांधी को मर्यादा का पाठ पढ़ाने में तनिक भी देर नहीं लगायी. लेकिन राहुल कहाँ मानने वाले थे, उन्होंने आज एक बार फिर देहरादून में उसी बयान को दोहराया और इस बार जूता को लात से रिप्लेस कर दिया. 

सीताराम केसरी की दुर्गति 

राहुल गांधी जब यह बोल रहे हैं कि आडवाणी की क्या दुर्गति की गई तो फिर सीताराम केसरी को क्यों भूल जाते हैं? कैसे सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें मुख्यालय से उठा कर बाहर फ़ेंक दिया था. एक वरिष्ठ नेता जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी कांग्रेस पार्टी को भेंट कर दी उसके साथ हुए हश्र को राहुल गांधी क्यों नहीं याद करते हैं? 

राहुल गांधी आज कल कुछ भी बोलते हैं तो उसे बार-बार दोहराते हैं. इसका मतलब है कि यह बयान उनके सुनियोजित राजनीतिक प्लान का हिस्सा होता है. राहुल गांधी ने ठान लिया है कि राजनीतिक बयानों के गिरते स्तर में वो भाजपा का भरसक मुकाबला करेंगे. चाहे इसके लिए सारी सीमाओं को लांघना ही क्यों न पड़े? 

इस बार का लोकसभा चुनाव दो कारणों से ऐतिहासिक होगा. 50 हजार करोड़ का चुनाव और राजनीतिक मर्यादा का अस्तित्वविहीन हो जाना. बात जब राजनीतिक पार्टियों के राजनीतिक अस्तित्व की हो तो फिर इन बयानों की उम्मीद आगे भी बरकरार रखनी चाहिए. 

टॅग्स :राहुल गांधीएल के अडवाणीनरेंद्र मोदीसोनिया गाँधी
Open in App

संबंधित खबरें

भारतसंविधान पर आक्रमण था और हमने हरा दिया?, राहुल-प्रियंका गांधी ने कहा-लोकतंत्र-अखंडता के लिए बड़ी जीत, वीडियो

भारतइलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का दिया आदेश, जानें क्या है पूरा मामला?

भारतअपने ही सांसदों के सामने खुद को हंसी पात्र बने राहुल गांधी, चिराग पासवान बोले-लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका होती, पता नहीं क्या बोल रहे, वीडियो

भारत"उन्हें सुनना सिरदर्द जैसा था..वह अपने बचपन के ट्रॉमा से गुजर रहे हैं", लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर BJP सांसद कंगना रनौत ने कहा, VIDEO

भारतप्रधानमंत्री और मेरे बीच पत्नी को लेकर कोई समस्या नहीं?, लोकसभा में अलग मूड में दिखे राहुल गांधी, वीडियो

भारत अधिक खबरें

भारतलोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हो सका, 230 सदस्यों ने इसके विरोध में किया मतदान

भारतटीईटी को लेकर संवेदनशील सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई पुनर्विचार याचिका

भारतConstitution 131st Amendment Bill: नहीं पारित हो सके विधेयक, पक्ष में 278, विरोध में पड़े 211 वोट, लोकसभा में 489 सदस्यों ने किया मतदान

भारत'महिला आरक्षण के खिलाफ INDI अलायंस': अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष पर जमकर साधा निशाना

भारतसुप्रीम कोर्ट नहीं असम अदालत का रुख करें?, गलत आधार कार्ड जमा करने पर फटकार, पवन खेड़ा को झटका, बीजेपी ने कहा-भगोड़े की तरह छिप रहे हैं?