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अयाज मेमन का कॉलम: भारतीय टीम में क्या है एमएस धोनी का रोल, हमेशा खुद देते हैं जवाब

By अयाज मेमन | Updated: March 5, 2019 17:57 IST

कुछ मुकाबलों में औसत प्रदर्शन के कारण टीम में धोनी के स्थान को लेकर चर्चा चली, लेकिन धोनी तमाम सवालों का जवाब अपने प्रदर्शन से ही देने में विश्वास करते हैं।

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ठळक मुद्देधोनी ने ऑस्ट्रेलिया में अच्छी विकेटकीपिंग के अलावा उम्दा बल्लेबाजी कर छाप छोड़ी।घरेलू सीरीज के तहत पहले मैच में भी धोनी का योगदान अहम रहा।वर्तमान में टीम में धोनी की भूमिका में परिवर्तन आया है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वन-डे की जीत में धोनी ने बढ़िया प्रदर्शन किया। शुरुआत से ही विश्व कप टीम में उनका स्थान पक्का था। हालांकि बीच के कुछ मुकाबलों में औसत प्रदर्शन के कारण जरूरी टीम में उनके स्थान को लेकर चर्चा चली। लेकिन मेरा मानना है कि धोनी तमाम सवालों का जवाब अपने प्रदर्शन से ही देने में विश्वास करते हैं।

धोनी ने ऑस्ट्रेलिया में अच्छी विकेटकीपिंग के अलावा उम्दा बल्लेबाजी कर छाप छोड़ी। इसके बाद घरेलू सीरीज के तहत पहले मैच में भी उनका योगदान अहम रहा। हालांकि पहले जैसे मैच फिनिशर की क्षमता उनके प्रदर्शन में अब नजर नहीं आएगी। इसकी वजह बढ़ती उम्र के चलते प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखना मुश्किल होता है। यही प्रकृति का नियम भी है। यही कारण है कि नए-नए विकल्पों को तलाशा जाता है।

फिलहाल फिनिशर के रूप में ऋषभ पंत और केदार जाधव के नाम शीर्ष पर चल रहे हैं। वर्तमान में टीम में धोनी की भूमिका में परिवर्तन आया है। एक छोर वह संभालकर रखेंगे तो दूसरे छोर से रन बरसेंगे। इससे पारी को लड़खड़ाने से बचाने में मदद मिलेगी। पहले मैच में उन्होंने 'गेम सेन्स' दिखाया।

युवा एक खिलाड़ी एक छोर पर स्वाभाविक अंदाज में तेजी से रन बनाते हुए आगे निकलता है तो दूसरे छोर से अनुभवी खिलाड़ी समय के अनुरूप उसका सहयोग करता है। धोनी ने यही किया और दूसरे छोर से केदार जाधव को पारी को मजबूती प्रदान की।

इन सब बातों को देखते हुए धोनी टीम के अहम खिलाड़ी बन गए हैं। यह सच है कि टीम की कमान उनके पास नहीं है, लेकिन उनके 'क्रिकेट माइंड' का कोई तोड़ नहीं है। इससे विराट कोहली को काफी मदद मिल रही है।

मैच के दौरान धोनी की गेंदबाजों के लिए सलाह बेशकीमती होती है। इसके अलावा समय के तकाजे को देखकर क्षेत्ररक्षण सेट करने में उनका कोई सानी नहीं है। लिहाजा, धोनी की ओर महज बल्लेबाज के रूप में नहीं देखा जा सकता। धोनी लंबे समय तक टीम के कप्तान रहा। इससे नए कप्तान के मन में ऐसी शंका भी आ सकती है कि पुराने कप्तान का प्रभाव टीम पर बना हुआ है।

लेकिन, सौभाग्यवश कोहली के साथ ऐसा नहीं कुछ भी नहीं हो रहा है। दूसरी महत्वपूर्ण कप्तानी छोड़ने के बाद खिलाड़ी अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। लेकिन, धोनी ऐसा खिलाड़ी नहीं है। वह हमेशा टीम हित के बारे में सोचते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात - धोनी और कोहली के बीच गजब का समन्वय है।

टॅग्स :एमएस धोनीभारत Vs ऑस्ट्रेलिया
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