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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: निवेश के अनुकूल नया परिदृश्य

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 24, 2019 07:04 IST

यकीनन इस समय भारत में वैश्विक कारोबार और निवेश की नई संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं. हाल ही में 20 सितंबर को वित्त मंत्नी निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने और भारत को एक आकर्षक निवेश देश के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से घरेलू कंपनियों के लिए कार्पोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी की है.

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इस समय देश में आर्थिक सुस्ती के बीच भी निवेश अनुकूल नया परिदृश्य दिखाई देने के तीन प्रमुख कारण हैं, एक- अमेरिका सहित वैश्विक निवेशकों से निवेश की नई संभावना, दो- भारत में कारपोरेट टैक्स में भारी कमी और तीन- वैश्विक प्रतिस्पर्धा, कारोबार और नवाचार में भारत की तेजी से सुधरती रैंकिंग.

गौरतलब है कि 22 सितंबर को प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने अमेरिका दौरे के दौरान 17 वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. इन कंपनियों की शुद्ध हैसियत एक लाख करोड़ डॉलर है और 150 देशों में इनका कारोबार है. इन कंपनियों के साथ-साथ दुनियाभर के उद्योग कारोबार से यह नई संभावना उभरी है कि भारत, चीन के बाद दुनिया के दूसरे कारखाने और वैश्विक निवेश का नया आकर्षक केंद्र बन सकता है. 

यकीनन इस समय भारत में वैश्विक कारोबार और निवेश की नई संभावनाएं उभरकर दिखाई दे रही हैं. हाल ही में 20 सितंबर को वित्त मंत्नी निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने और भारत को एक आकर्षक निवेश देश के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से घरेलू कंपनियों के लिए कार्पोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी की है. साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश करने वाली नई घरेलू कंपनियों को मात्न 15 फीसदी की दर से ही कार्पोरेट टैक्स देना होगा. 

ऐसे में कॉर्पोरेट टैक्स घटाना देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक वरदान साबित हो सकता है, साथ ही कार्पोरेट टैक्स की दर घटाने से चीन से कारोबार समेट रही अमेरिकी और अन्य देशों की कंपनियों के सामने भारत एक आकर्षक निवेश केंद्र के रूप में पहचान बना सकता है. ऐसे में जब भारत सबसे कम कार्पोरेट टैक्स की दरों वाले देशों में शामिल हो गया है तब भारत में विदेशी कंपनियों के द्वारा निवेश परिप्रेक्ष्य में दस्तक दिए जाने की नई संभावनाएं उभरती दिखाई दे रही हैं.

हम आशा करें कि 20 सितंबर को देश में कार्पाेरेट टैक्स को घटाने का जो अहम कदम उठाया गया है और जिस तरह पिछले एक वर्ष में भारत  नवाचार, प्रतिस्पर्धा, बौद्धिक संपदा, शोध, आउटसोर्सिग जैसे क्षेत्नों में आगे बढ़ा है, उससे भारत में वैश्विक निवेश और कारोबार बढ़ने की नई संभावनाएं हैं.

टॅग्स :बिज़नेस
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