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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉगः नई ई-कॉमर्स नीति की जरूरत 

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: June 27, 2019 20:43 IST

इन दिनों जब भारत की नई ई-कॉमर्स नीति को आकार देने की तैयारी की जा रही है, तब अमेरिका सहित विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियां नई ई-कॉमर्स नीति के तहत डेटा लोकलाइजेशन न किए जाने हेतु अपनी सरकारों के जरिए भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही हैं

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इन दिनों जब भारत की नई ई-कॉमर्स नीति को आकार देने की तैयारी की जा रही है, तब अमेरिका सहित विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियां नई ई-कॉमर्स नीति के तहत डेटा लोकलाइजेशन न किए जाने हेतु अपनी सरकारों के जरिए भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही हैं. पिछले दिनों भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों गूगल, फेसबुक, एमेजॉन, एप्पल आदि के उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों के द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्नी पीयूष गोयल से मुलाकात के दौरान डेटा लोकलाइजेशन को स्वतंत्न रखने की पेशकश की है. 

गौरतलब है कि 19 जून को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्नालय ने ई-कॉमर्स के विभिन्न पहलुओं पर इस क्षेत्न के उद्योग प्रतिनिधियों के साथ वाणिज्य मंत्नी पीयूष गोयल की विशेष बैठक आयोजित की. इस बैठक में ई-कॉमर्स नीति के मसौदे पर इस क्षेत्न की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए. 

यह बात महत्वपूर्ण है कि देश में खुदरा कारोबार में जैसे-जैसे विदेशी निवेश बढ़ा वैसे-वैसे ई-कॉमर्स की रफ्तार बढ़ती गई. निश्चित रूप से छलांगे लगाकर बढ़ते हुए देश के ई-कॉमर्स बाजार के लिए बदलते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कारोबार परिदृश्य में नई ई-कॉमर्स नीति जरूरी है. हाल ही में प्रकाशित डेलॉय इंडिया और रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्ष 2021 तक 84 अरब डॉलर का हो जाएगा. वर्ष 2017 में यह 24 अरब डॉलर का था. भारत में ई-कॉमर्स बाजार सालाना 32 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है.

निस्संदेह ई-कॉमर्स ने देश में खुदरा कारोबार (रिटेल सेक्टर) में क्रांति ला दी है. देश में इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की संख्या 60 करोड़ से भी अधिक होने के कारण देश में ई-कॉमर्स की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है. भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर देश बन गया है. दुनिया के कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में भारत का हिस्सा 12 फीसदी है. ई-कॉमर्स बाजार की यह वृद्धि देश में बढ़ती आबादी, तेज शहरीकरण और मध्यम वर्ग के तेजी से बढ़ने की वजह से हो रही है. हम आशा करें कि मोदी-2 सरकार डेटा लोकलाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी. 

टॅग्स :बिज़नेस
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