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जयशंकर ने ताजिकिस्तान की संसद के स्पीकर से मुलाकात की

By भाषा | Updated: March 31, 2021 17:14 IST

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दुशांबे, 31 मार्च विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को ताजिकिस्तान के स्पीकर जाकिरजादा मोहम्मदताहिर जोइर से मुलाकात की और भारत-ताजिकिस्तान सहयोग के लिए मजबूत संसदीय समर्थन की सराहना की।

जयशंकर नौवें ‘हार्ट ऑफ एशिया’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए दुशांबे पहुंचे हैं।

इससे पहले दिन में, मंत्री ताजिकिस्तान के संस्थापक के स्मारक पर पहुंचे थे।

जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ दुशांबे में दोस्ती स्क्वायर पर हूं। पहले ताजिक राज्य के संस्थापक इस्माइली सोमोनी के स्मारक पर श्रद्धांजलि दी।’’

डूस्टी स्क्वायर का दौरा करने के बाद जयशंकर ने स्पीकर से मुलाकात की ।

जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ ताजिकिस्तान के स्पीकर जाकिरजादा मोहम्मदताहिर जोइर से मुलाकात की। भारत-ताजिकिस्तान सहयोग के लिए मजबूत संसदीय समर्थन की सराहना की।’’

जयशंकर ने मंगलवार को ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमाम अली रहमान (68) से यहां मुलाकात की थी और द्विपक्षीय आर्थिक तथा विकास सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा की थी।

उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति रहमान को बधाई भी दी।

जयशंकर ने ट्वीट किया था, " मेरी अगवानी के लिए ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति को धन्यवाद... राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति रहमान को बधाई भी दी। हमारे द्विपक्षीय आर्थिक और विकास सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। अफगान स्थिति के संबंध में उनके आकलन की सराहना की।"

जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि उन्होंने राष्ट्रपति रहमान के साथ द्विपक्षीय सहयोग और अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा की।

उन्होंने कहा था, ‘‘हमने चर्चा की कि हमारे आर्थिक, व्यापार और निवेश सहयोग को कैसे बढ़ाया जाए। क्षमता निर्माण के संदर्भ में अधिक विस्तार कैसे किया जाए, अपने राजनीतिक सहयोग को कैसे बढ़ाया जाए और अफगानिस्तान पर मिलकर कैसे काम किया जाए।"

उन्होंने कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में ताजिकिस्तान के साथ भारत की एकजुटता भी व्यक्त की।

बाद में उन्होंने ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री कर्नल जनरल शेर अली मिरजो से भी मुलाकात की और रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की।

अफगानिस्तान के साथ ताजिकिस्तान 1,400 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है और भारत के लिए यह काफी भू-रणनीतिक महत्व रखता है। भारत आतंकवाद विरोधी सहयोग के तहत इसे सैन्य सहायता मुहैया कराता रहा है।

भारत ने दुशांबे के पास अयानी एयरबेस को भी विकसित किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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