सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर भाजपा में अंदरूनी खुशी नहीं?, "कमांडर के आदेश" को लेकर सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म, विजय सिन्हा हो रहे ट्रोल?
By एस पी सिन्हा | Updated: April 17, 2026 14:51 IST2026-04-17T14:32:02+5:302026-04-17T14:51:39+5:30
सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाने लगी थी। सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम से पीएम मोदी के द्वारा दूरी बना ली गई।

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पटनाः भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के द्वारा यह कहे जाने पर कि "कमांडर के आदेश" पर भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव उन्होंने रखा, सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है। विजय सिन्हा इस बयान के बाद सोशल मीडिया में ट्रोल होने लगे हैं। सोशल मीडिया में लोगों ने लिखा है कि विजय सिन्हा को भी टावर पर चढ जाना चाहिए, जिस तरह बिहार में अभी ट्रेंड चल रहा है। कोई गर्लफ्रेंड के लिए चढ रहा है तो कोई बॉयफ्रेंड के लिए। उसी तर्ज पर विजय सिन्हा को भी कदम उठाना चाहिए।
दरअसल, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर भाजपा में अंदरूनी खुशी नहीं देखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार के द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद नये मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी आने की चर्चा जोरों पर थी। यही कारण है कि हवाई अड्डा से लेकर राजभवन तक आनन फानन में बैरिकेडिंग की गई थी।
सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाने लगी थी। लेकिन सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम से पीएम मोदी के द्वारा दूरी बना ली गई। यह सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो आलाकमान के द्वारा सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगाए जाने से वर्षों से पार्टी का झंडा ढो रहे कैडर बेस लोगों के बीच निराशा की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
शायद यही कारण है कि बिहार में पहली बार सत्ता के शीर्ष पर पर पहुंचने के बावजूद भाजपा कार्यकर्ताओं-नेताओं के द्वारा जमकर जश्न नहीं मनाया गया। भाजपा के लोगों का मानना है कि दागदार छवि का व्यक्ति और लालू यादव के पाठशाला में सियासी पाठ पढने वाले को आयातित कर शीर्ष की गद्दी पर बिठा दिया गया। जबकि वर्षों से संघर्ष करने वाले नेता हाशिये पर धकेल दिए गए।
शायद यही कारण है कि विजय सिन्हा ने मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शीर्ष नेतृत्व (कमांडर) के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यह वर्षों की मेहनत और पार्टी के फैसले के अनुरूप है। एक सवाल के जवाब में विजय सिन्हा ने कि पार्टी को सत्ता में लाने के लिए उन्होंने वर्षों-बरस जमीन पर मेहनत की, पसीना बहाया। लहू बहाया, बलिदान दिया।
आज कमल खिलाने का अवसर आया तो मैंने भाजपा की सिपाही के नाते अपने कमांडर के आदेश के अनुसार गठबंधन की राजनीति को लेकर चलने के लिए सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया। ऐसे में विजय सिन्हा के इस बयान को राजनीतिक दृष्टि के काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार कैबिनेट में विजय सिन्हा सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री थे।
अपने कुछ महीनों के कार्यकाल में ही भूमि सुधार को लेकर कठोर कदम उठाये, जिससे आम लोगों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सम्राट चौधरी सरकार में विजय सिन्हा को कहां एडजस्ट किया जाएगा। बता दें कि विजय कुमार सिन्हा के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1988 में भाजपा के सदस्य बनने के साथ हुई थी।
उनको भाजपा का बूथ लेवल कार्यकर्ता बनाया गया था। हालांकि करीब सात साल में विजय सिन्हा ने भाजपा में अपना प्रभाव बढ़ा लिया। सन 2005 के चुनाव में भाजपा ने उनको पहली बार लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। वे इस चुनाव में जीत गए, लेकिन उनकी यह सफलता अधिक समय तक कायम नहीं रह सकी।
सन 2005 में ही बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में वे सिर्फ 80 वोटों से हार गए। 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में लखीसराय सीट पर विजय हासिल की। इसके बाद विजय सिन्हा का विजय रथ कभी नहीं थमा। वे लगातार 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने कभी अपनी विधानसभा सीट भी नहीं बदली।
विजय सिन्हा सन 2017 में पहली बार मंत्री बने थे। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उनको पहली बार 29 जुलाई 2017 को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उन्हें श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया था। बिहार में 25 नवंबर 2020 को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार गठित हुई तो विजय सिन्हा को बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया।
28 जनवरी 2024 को सिन्हा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। सन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एक बार फिर से सरकार गठित हुई। विजय सिन्हा को एक बार फिर से उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया।
जानकारों के अनुसार विजय सिन्हा तो मात्र एक उदाहरण हैं। ऐसे कई नेता हैं जो पार्टी के लिए झंडा ढोने के दौरान लाठी डंडे खाए, लेकिन वक्त आने पर आयातित व्यक्ति ने सबके अरमानों पर पानी फेर दिया। इसको लेकर दल के अंदर नाराजगी देखी जा रही है।

