पटनाःबिहार की सियासत में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज की परंपरा एक बार फिर सियासी रंग में नजर आई। इसी क्रम में गुरुवार को पटना में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख पासवान के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए। इस अवसर पर चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व० रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रामविलास पासवान के राजनीतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक न्याय और दलित राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामविलास पासवान का संघर्ष और उनकी राजनीतिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगी।
इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, सांसद अरुण भारती, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, बड़ी संख्या में कार्यकर्तागण एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू विधायक चेतन आनंद के आवास पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर चेतन आनंद ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस आयोजन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने बिहार की सियासत में एकजुटता और आगामी रणनीतियों के संकेत दिए।
सभी नेताओं ने पारंपरिक अंदाज में दही-चूड़ा का आनंद लिया और एक-दूसरे को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। राजनीतिक गलियारों में इस भोज को केवल सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। चिराग पासवान ने इस अवसर पर कहा कि मकर संक्रांति का पर्व आपसी भाईचारे और एकता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि एनडीए परिवार पूरी मजबूती के साथ बिहार के विकास के लिए एकजुट है और आने वाले समय में जनता के विश्वास पर खरा उतरने का काम करेगा। चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभव और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बिहार ने विकास के कई नए आयाम छुए हैं।
वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस आयोजन को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दही-चूड़ा भोज बिहार की सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, जो समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार का लक्ष्य बिहार के हर तबके तक विकास पहुंचाना है और इसके लिए सभी सहयोगी दल मिलकर काम कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों के जरिए एनडीए अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करने का प्रयास कर रहा है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं, दही-चूड़ा भोज जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से गठबंधन की मजबूती का प्रदर्शन किया जा रहा है।
इस तरह दही-चूड़ा भोज ने बिहार की सियासत में एनडीए की एकजुटता और आपसी समन्वय का स्पष्ट संदेश भी दिया। आने वाले दिनों में ऐसे राजनीतिक-सामाजिक आयोजनों के जरिए बिहार की राजनीति और भी सक्रिय होती नजर आ सकती है।