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संक्रमण श्रृंखला तोड़ने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार सबसे बड़ा सामाजिक उपकरण है: हर्षवर्धन

By भाषा | Updated: April 16, 2021 19:01 IST

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नयी दिल्ली, 16 अप्रैल केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा कि लोगों ने कोविड-19 महामारी के प्रति लापरवाह रुख अपनाया जो बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा कि संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार सबसे बड़ा सामाजिक उपकरण है।

उन्होंने कोविड-19 मामलों में वृद्धि के मद्देनजर स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे का आकलन करने के लिए यहां एम्स ट्रॉमा सेंटर का दौरा करने के बाद यह टिप्पणी की।

हर्षवर्धन ने कहा कि कोरोना वायरस मुक्त माहौल बनाने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार (सीएबी) का पालन करने के वास्ते लोगों को प्रोत्साहित करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हर्षवर्धन के हवाले से एक बयान में कहा, ‘‘भारत के 52 जिले ऐसे हैं जिनमें सात दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया, चार जिलों में 21 दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया और 44 जिलों में 28 दिनों में कोई नया मामला नहीं आया।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘हमारे पास पिछले वर्ष की तुलना में इस बीमारी के बारे में अधिक अनुभव, ज्ञान और समझ है। उन्होंने कहा कि केंद्र स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, बिस्तरों की संख्या बढ़ाने से लेकर ऑक्सीजन, टीकों और चिकित्सा उपकरणों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

एम्स ट्रॉमा सेंटर के अपने दौरे के दौरान, उन्होंने संस्थान में बिस्तरों की संख्या का आकलन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में 266 बिस्तर हैं, जिनमें से 253 पर मरीज हैं। एम्स ट्रॉमा सेंटर में 70 और बिस्तरों को बढ़ाने की व्यवस्था की जाएगी।’’

हर्षवर्धन ने कहा कि एम्स के झज्जर परिसर में 100 और बिस्तर जोड़े जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा करेंगे और सुविधाओं का आकलन करेंगे।

देश में रेमडेसिविर की कथित कमी को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि निर्माताओं को दवा का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है।

उन्होंने कहा कि प्रवर्तन अधिकारियों से कहा गया है कि वे रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

कोरोना योद्धाओं के योगदान की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि हमारे योद्धा न केवल वर्तमान स्थिति के बारे में जानते हैं बल्कि चिंतित भी हैं। ऐसा नहीं है कि हमने 2020 में समस्याओं का सामना नहीं किया है। लेकिन 2021 में, पिछले वर्ष की तुलना में हमारे पास अधिक अनुभव और समझ है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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