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कफ सिरपः एसटीएफ की गिरफ्त में अभिषेक और शुभम, 15 दिन से तलाश कर रहे थे अधिकारी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में भेजते थे दवा

By राजेंद्र कुमार | Updated: December 11, 2025 17:29 IST

Cough Syrup: दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाकर बड़ी मात्रा में फेन्सेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश अवैध तरीके से भेजते थे.

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ठळक मुद्देपकड़े गए अभिषेक और शुभम फेन्सेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं की अवैध तस्करी से जुड़े थे.सूचना के आधार पर अब इस मामले में कई अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गई है.सीबीएन के अधिकारी उन दवा व्यापारियों और अपराधियों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है,

लखनऊः प्रतिबंधित कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं की अवैध तस्करी से जुड़े अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को एसटीएफ़ ने गुरुवार को लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया. अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा की तलाश बीते 15 दिनों से एसटीएफ़ के अफसर कर रहे थे. पकड़े गए अभिषेक और शुभम फेन्सेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं की अवैध तस्करी से जुड़े थे.

एसटीएफ़ के अफसरों के मुताबिक यह दोनों फर्जी फर्मों के माध्यम से दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाकर बड़ी मात्रा में फेन्सेडिल कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश अवैध तरीके से भेजते थे.

इन दोनों ने एसटीएफ़ को बताया है कि तस्करी का माल ई-वे बिल और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भेजा जाता था. इनके नेटवर्क में फार्मा कंपनियों से जुड़े लोग और कई बोगस फर्म संचालक शामिल थे. इन दोनों से मिली सूचना के आधार पर अब इस मामले में कई अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गई है.

सीबीएन भी जांच में जुटी

कोडीन युक्त दवाओं की देश के कई राज्यों और बांग्लादेश भेजे जाने के मामले की जांच अब सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) ने भी शुरू कर दी है. सीबीएन के लखनऊ कार्यालय ने ग्वालियर स्थित कार्यालय से फार्मा कंपनियों को आवंटित होने वाले कोडीन का ब्योरा मांगा है. इसके साथ ही सीबीएन के अधिकारी उन दवा व्यापारियों और अपराधियों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है,

जिनके खिलाफ बीते कुछ वर्षों के दौरान नशीली दवाओं की खेप बरामद की गई थी. सीबीएन के अधिकारियों का कहना है कि यूपी में नशीले कफ सिरप सिंडिकेट की जड़ें काफी गहरी हैं. प्रदेश में दवा के थोक मार्केट में प्रतिबंधित कफ सिरप और  कोडीन युक्त दवाओं की बिक्री धड़ल्ले से होती थी, लेकिन प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने कोई कठोर कार्रवाई नहीं की.

जबकि बीते जुलाई में सीबीएन ने लखनऊ के अमीनाबाद में छापा मारकर नशे में इस्तेमाल होने वाली 20 लाख टेबलेट और कोडीन युक्त कफ सिरप की 5700 बोतलें बरामद की थी.इसके कुछ माह बाद ही कोडीन युक्त कफ सिरप पीने से राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई बच्चों की मौत हुई.

इस मामले के तूल पकडने के चलते ही यूपी से बड़े पैमाने पर कोडीनयुक्त कफ सिरप को देश के कई राज्यों और नेपाल-बांग्लादेश तक भेजने के सिंडिकेट का पता चला. इस सिंडिकेट से जुड़े अभिषेक और शुभम की गिरफ्तारी हुई है.

इनसे मिली जानकारी के आधार पर इस  सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों को जल्दी ही पकड़ा जाएगा. सीबीएन भी इस  सिंडिकेट से जुड़ी फार्मा कंपनियों के कारोबार की छानबीन करेगी ताकि देश और प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जा रहा है.

अब तक इनको पकड़ा गया

उत्तर प्रदेश से प्रतिबंधित कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं को बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तथा नेपाल भेजने में लिप्त सिंडिकेट के शामिल सहारनपुर के विभोर राणा, विशाल राणा, विशाल उपाध्याय, गाजियाबाद का सौरभ त्यागी, शादाब, पप्पन यादव, वाराणसी के भोला जायसवाल, आकाश पाठक, लखनऊ से अमित सिंह टाटा और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह मनोहर जायसवाल, अभिषेक शर्मा, शुभम शर्मा और कानपुर का विनोद अग्रवाल को पकड़ा गया है.

इस सिंडिकेट का मुखिया शुभम जायसवाल अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है. इसकी तलाश की जा रही है. ईडी ने भी शुभम जायसवाल के घर नोटिस चस्पा कर उनसे ईडी ऑफिस में पूछताछ के लिए बुलाया है. फिलहाल प्रतिबंधित कफ सिरप और कोडीन युक्त दवाओं की तस्करी के मामले में एसटीएफ़, एफडीए, ईडी और  सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स के जांच में जुटने के चलते अब यह दावा किया जा रहा है कि यूपी से हो रहे 500 करोड़ रुपए से अधिक के कफ सिरप तस्करी के अवैध कारोबार में जुटे सिडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा. अभी तक इस मामले में 200 से अधिक दवा दुकानों का लाइसेंस रद्द किया गया है. 

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