पटना: बिहार के जमुई से स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग मरीज की तड़प-तड़पकर मौत एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म होने के कारण हो गई। मरीजों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर तक पहुंचाने में वरदान साबित होने वाली जेन प्लस कंपनी द्वारा संचालित 102 एम्बुलेंस के महज 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही तेल खत्म हो गया और सड़क किनारे खड़ी गाड़ी में मरीज दो घंटे तक तड़पता रहा। आखिरकार उसकी सांसें थम गईं।
परिजनों का आरोप है कि झाझा प्रखंड क्षेत्र के बाबू बांक गांव निवासी 75 वर्षीय धीरज रविदास को जुमई सदर अस्पताल से बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही सिकंदरा-शेखपुरा रोड पर मतासी गांव के पास अचानक एम्बुलेंस का ईंधन खत्म हो गया। ड्राइवर के पास पेट्रोल कार्ड तो था, लेकिन संबंधित कंपनी के पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलने का बहाना बन गया। न कोई बैकअप, न कोई वैकल्पिक इंतजाम। भीषण गर्मी, तपती सड़क और बेबस परिजन मरीज करीब दो घंटे तक एम्बुलेंस में ही तड़पता रहा। परिजन मदद के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन व्यवस्था खामोश रहा। आखिरकार धीरज रविदास ने दम तोड़ दिया, और एम्बुलेंस खड़ी-खड़ी मौत की गवाही देती रही।
मृतक के बेटे अजीत रविदास ने साफ आरोप लगाया है कि यह सीधा-सीधा कातिलाना लापरवाही का मामला है। उनका कहना है कि न तो मरीज को बचाने की कोई कोशिश की गई और न ही दूसरी एंबुलेंस या अन्य व्यवस्था समय पर कराई गई। बाद में दूसरी 102 एंबुलेंस से शव को सदर अस्पताल लाया गया और फिर शव वाहन से घर भेजा गया। उन्होंने बताया कि उनके पास पैसे मौजूद थे, जिससे रास्ते में ईंधन भरवाया जा सकता था, लेकिन चालक टालमटोल करता रहा और स्थिति को संभालने में विफल रहा।
इस मामले को लेकर उन्होंने सिविल सर्जन, एसपी और डीएम से शिकायत करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही है। परिजनों के अनुसार धीरज रविदास की तबीयत दो दिन पहले बिगड़ी थी। झाझा में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सदर अस्पताल लाया गया, जहां जांच में सिर में ब्लड जमने की बात सामने आई। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। इस बीच जेन प्लस कंपनी के जिला क्लस्टर लीडर नीतीश कुमार ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है।
उन्होंने कहा कि चालक के पास एक विशेष कंपनी का कार्ड था और उसी पेट्रोल पंप से ईंधन लेने का प्रावधान है, लेकिन वहां ईंधन उपलब्ध नहीं था। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। वहीं सिविल सर्जन अशोक कुमार सिंह के अनुसार उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी, लेकिन एंबुलेंस में ईंधन खत्म होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।