लाइव न्यूज़ :

परीक्षा के अनचाहे परिणाम से न हों असहज

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 24, 2026 05:29 IST

10th, 12th Class Result 2026: नर्सरी में बच्चे के 90-92 प्रतिशत अंक आ जाने पर अभिभावकों का उत्साह कुछ इस कदर होता है मानो उसने आईआईटी, आईआईएम का पाठ्यक्रम पूरा कर लिया हो.

Open in App
ठळक मुद्देदिलोदिमाग में पर्चे के पुनरीक्षण तक रुकने का भी हौसला नहीं होता.परिवार या मोहल्ले में किसी परिचित के घर न हो जाए.बचपन से ही हम अपने बच्चों को तुलना के मकड़जाल में उलझा देते हैं.

किरण नारायण मोघे

यह सीजन परीक्षा परिणामों का है और अखबारों के प्रथम पृष्ठ स्थानीय प्रतिभाओं के शानदार प्रदर्शन की खबरों से पटे पड़े हैं. यह एक सालाना रिवायत की तरह हो चुका है. अखबारों के पहले पन्ने जहां कामयाबी के नये आयाम हासिल करने वाले विद्यार्थियों के दमकते चेहरों,  कामयाबी के लिए उनके द्वारा की गई मेहनत के अलावा मोबाइल, फिल्म, मौज-मस्ती से पर्याप्त दूरी की खबरों से लदे होते हैं, भीतर के पन्ने नाकामयाब विद्यार्थियों की खुदकुशी जैसी हिला देने वाली घटनाओं से पटे पड़े होते हैं. कई विद्यार्थी तो इतने टूट जाते हैं कि उनके दिलोदिमाग में पर्चे के पुनरीक्षण तक रुकने का भी हौसला नहीं होता.

यही समाज का वह चेहरा है जहां कई जीवन वक्त से पहले दम तोड़ देते हैं. जिन घरों में ऐसा हादसा होता है उसे तो दोबारा जिंदगी की रफ्तार से कदमताल के लिए दशकों लग जाते हैं. दुर्भाग्य से समाज के इस पहलू की ओर तब तक कोई गंभीरता से ध्यान नहीं देता जब तक कि यह अपने परिवार या मोहल्ले में किसी परिचित के घर न हो जाए.

परीक्षा परिणाम आने के पहले और बाद के 24 घंटे इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. क्या स्कूली शिक्षक, अभिभावक इस दौरान अपने नौनिहालों को भावनात्मक, मानसिक आधार नहीं दे सकते. बचपन से ही हम अपने बच्चों को तुलना के मकड़जाल में उलझा देते हैं.

आपने देखा ही होगा कि नर्सरी में बच्चे के 90-92 प्रतिशत अंक आ जाने पर अभिभावकों का उत्साह कुछ इस कदर होता है मानो उसने आईआईटी, आईआईएम का पाठ्यक्रम पूरा कर लिया हो. आजकल तो आईआईटी, आईआईएम में जाकर भी बच्चे हिम्मत हार जाते हैं.

दिक्कत यह है कि बचपन से सफलता पर वाहवाही सुनने वाला बच्चा जब पहली बार असफल होता है तो उसे पता ही नहीं होता कि कैसे प्रतिक्रिया दे. सफलता में तो दुनिया साथ देती है, लेकिन असफलता के वक्त साथ देना क्या परिवार की जिम्मेदारी नहीं है? ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण वाकयों को पूरी तरह से रोक पाना तो फिलहाल नामुमकिन लग सकता है, लेकिन इस दिशा में कुछ तो महत्वपूर्ण पहल करनी ही होगी.

शिक्षा पद्धति, शिक्षकों का स्तर, कौशल आधारित शिक्षा पर ज्यादा ध्यान, छात्रों ही नहीं उनके अभिभावकों का सही मार्गदर्शन वक्त का तकाजा है. दुनिया के सबसे युवा देश भारत में इसे अब राष्ट्रीय आपदा की ही तरह लेना चाहिए. जब हम प्रदूषण, वन्यजीवों, पर्यावरण के लिए गंभीरता दिखाते हैं तो विद्यार्थियों के लिए, जो हमारे देश का भविष्य हैं, इतने गंभीर क्यों नहीं हो पा रहे. असफलता का सामना करने वाले बच्चों के लिए वक्त निकालें, वरना बहुत देर हो चुकी होगी.

टॅग्स :सीबीएसईसीबीएसई.एनआईसी.इनBoard
Open in App

संबंधित खबरें

भारतUK Board Result 2026: उत्तराखंड बोर्ड कक्षा 10, 12 का रिजल्ट इस तारीख को सुबह 10 बजे होगा घोषित, ऐसे देखें

भारतCBSE 10th Result 2026: 93.7 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए, CBSE 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी, यहां पर करिए चेक?

भारतCBSE 10th Result 2026: DigiLocker से ऐसे चेक करें Class 10 का रिजल्ट

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

ज़रा हटकेClass 12 Maths Paper QR Code: बारहवीं प्रश्न पत्र के क्यूआर कोड से सीबीएसई ने किया मजाक?, प्रश्न पत्र के क्यूआर कोड को स्कैन करते ही खुल रहा यूट्यूब वीडियो 

भारत अधिक खबरें

भारतलोकतंत्र को साहसी और जीवंत संसद चाहिए

भारतलोकमत की दिल्लीवासियों को सौगात, शुक्र को कैलाश खेर की लाइव ‘महफिल’, दिग्गज गायक ‘लोकमत सुर ज्योत्सना राष्ट्रीय संगीत पुरस्कार’ से होंगे सम्मानित

भारतनोटबंदी केस में बड़ा आदेश, आरबीआई को 2 लाख रुपये के नोट बदलने के निर्देश

भारतप्रवेश वाही, मोनिका पंत, जय भगवान यादव और मनीष चड्ढा होंगे बीजेपी प्रत्याशी?, आप के उम्मीदवार से टक्कर?, 29 अप्रैल को मतदान

भारतUP Board 10th, 12th Results 2026 Declared: 90.42 फीसदी रहा दसवीं का परिणाम और इंटरमीडिएट का 80.38 प्रतिशत