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पहलगाम नरसंहार के एक साल बाद भी नहीं खुले बैसरन वैली, डोनवान घाटी और चंदनवाड़ी, सिर्फ दावे ही दावे बाकी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: April 24, 2026 10:14 IST

Pahalgam:  अगर बैसरन, कश्मीर घाटी और डोनवान घाटी पूरी तरह से फिर से खुल जाती हैं, तो हमारा काम-धंधा भी फिर से चल पड़ेगा।

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Pahalgam: पहलगाम नरसंहार के एक साल बाद स्थिति को लेकर चाहे कितने भी दावे किए जाएं पर हकीकत यही है कि अभी भी कई पर्यटनस्‍थल बंद हैं और नरसंहार के उपरांत जिन 48 पर्यटनस्‍थलों को एक लंबे अरसे के उपरांत खोला तो गया पर वहां गैर सरकारी तौर पर कइ्र पाबंदियां अभी भी लागू हैं। यह सच है कि पहलगाम में हुए जानलेवा आतंकी हमले की पहली बरसी पर, बैसरन घाटी, कश्मीर घाटी, डोनवान घाटी और चंदनवाड़ी मार्ग जैसे अहम टूरिस्ट जगहों को फिर से खोलने की मांग जोर पकड़ रही है। इस मामले से जुड़े लोग अधिकारियों से गुजारिश कर रहे हैं कि इन जगहों पर पूरी तरह से आने-जाने की इजाजत दी जाए और इस इलाके की टूरिज्‍म से जुड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाया जाए।

स्थानीय लोगों के लिए, यह मांग सिर्फ टूरिज्‍म से जुड़ी नहीं है, बल्कि उनके गुजारे का भी सवाल है। कई लोगों का कहना है कि इन इलाकों में आने-जाने पर लगी पाबंदियों की वजह से उनकी रोजी-रोटी पर बहुत बुरा असर पड़ा है।एक होटल मालिक, गुलाम नबी कहते थे कि हमने पूरे एक साल तक बड़े सब्र से इंतजार किया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल हमारा कारोबार तो बेहतर हुआ है, लेकिन टूरिस्ट यहां ज्‍यादा दिनों तक नहीं रुक रहे हैं, क्योंकि घूमने की कई जगहें अभी भी बंद हैं। बैसरन, डोनवान और दूसरी घाटियों को फिर से खोलने से हालात में बहुत बड़ा सुधार आएगा।

घोड़ों से सवारी कराने वाले लोग, जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह से इन रास्तों पर टूरिस्टों की आवाजाही पर ही निर्भर करती है, उनका कहना है कि बंद पड़ी घाटियों को फिर से खोलना उनके गुजारे के लिए बेहद जरूरी है।

घोड़ों की देखभाल करने वाले इमरान शेख कहते थे कि कि इस आतंकी हमले ने उन्हें पूरी तरह से तोड़कर रख दिया था।

उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद हमें लगा था कि अब हमारी रोजी-रोटी पूरी तरह से खत्म हो गई है। धीरे-धीरे हालात में सुधार हुआ, खासकर अमरनाथ यात्रा के बाद, लेकिन अभी भी हम पूरी तरह से पहले जैसे सामान्य हालात में नहीं लौट पाए हैं। अगर बैसरन, कश्मीर घाटी और डोनवान घाटी पूरी तरह से फिर से खुल जाती हैं, तो हमारा काम-धंधा भी फिर से चल पड़ेगा।

घोड़ों से सवारी कराने वाले एक और व्यक्ति, बशीर अहमद कहते थे कि जब टूरिस्टों को यह पता चलता है कि कुछ खास रास्तों पर जाने की इजाजत नहीं है, तो वे अक्सर अपनी निराशा जाहिर करते हैं। उसका कहना था कि लोग यहां प्रकृति को करीब से देखने आते हैं। जब उन्हें बताया जाता है कि वे बैसरन या चंदनवाड़ी से आगे नहीं जा सकते, तो उन्हें निराशा होती है।

इन जगहों को फिर से खोलने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों, दोनों को फायदा होगा। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि चंदनवाड़ी मार्ग को फिर से खोलने से—जो पर्यटकों और तीर्थयात्रियों, दोनों के लिए एक अहम रास्ता है—लोगों का भरोसा और मजबूत होगा और आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ेगी।

इस पहाड़ी टूरिस्ट जगह पर घूमने आए टूरिस्टों का कहना है कि यहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था ने उनका भरोसा फिर से कायम करने में मदद की है, लेकिन खूबसूरत जगहों पर जाने की पाबंदी की वजह से उनके घूमने का मजा थोड़ा किरकिरा हो जाता है।

पिछले एक साल में, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सफल अमरनाथ यात्रा की बदौलत, टूरिस्टों की आमद में धीरे-धीरे सुधार तो हुआ है, लेकिन कई खास जगहें अभी भी बंद हैं। इसकी वजह से टूरिस्टों और स्थानीय लोगों, दोनों को ही यह महसूस हो रहा है कि हालात अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं।

मुंबई से घूमने आईं आयशा खान ने भी कुछ ऐसी ही राय जाहिर की। वे कहती थीं कि पहलगाम बहुत ही खूबसूरत और शांत जगह है, और यहां के स्थानीय लोग भी बहुत मददगार हैं। लेकिन सभी खास जगहों को फिर से खोलने से एक मजबूत संदेश जाएगा कि अब सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो गया है।

दिल्ली से आए एक टूरिस्ट, रोहन मेहता कहते थे कि हमें यहां सुरक्षित महसूस होता है और यहां का माहौल भी बहुत अच्छा है। लेकिन जब हमें पता चलता है कि बैसरन या दूसरी घाटियों जैसी जगहें बंद हैं, तो हमें लगता है कि हम पहलगाम के असली मजे से महरूम रह गए हैं। इन जगहों को फिर से खोलने से यकीनन और भी ज्‍यादा टूरिस्ट यहां आएंगे।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़ी बातें सबसे ज्‍यादा जरूरी हैं और दूसरी जगहों को फिर से खोलने का कोई भी फैसला पूरी तरह से जांच-परख करने के बाद ही लिया जाएगा।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरट्रेवल
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