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रोचक खुलासा! अयोध्या केस में शाहरुख खान को जस्टिस बोबडे बनाना चाहते थे मध्यस्थ, किंग खान भी थे तैयार

By विनीत कुमार | Updated: April 24, 2021 08:36 IST

एसए बोबडे शुक्रवार को चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हो गए। सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन की ओर से उनके लिए आयोजित विदाई समारोह में हालांकि एक दिलचस्प खुलासा भी हुआ

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने किया खुलासाजस्टिस एसए बोबडे की विदाई समारोह में अयोध्या मामले को लेकर बताई दिलचस्प बातविकास सिंह के अनुसार शाहरुख खान भी अयोध्या मामले में मध्यस्थता के लिए तैयार थे

अयोध्या रामजन्मभूमि मामले का निपटारा हो चुका है। राम मंदिर के निर्माण के लिए काम भी शुरू हो चुका है। इस बीच इस पूरे केस को लेकर एक दिलचस्प खुलासा सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील विकास सिंह ने किया है।

विकास सिंह के अनुसार इस केस में एक समय ऐसा भी आया था जब चीफ जस्टिस पद से शुक्रवार को रिटायर हुए एस ए बोबडे शाहरुख खान को अयोध्या विवाद में मध्यस्थ बनाना चाहते थे।

विकास सिंह ने ये बात शुक्रवार को एसए बोबडे की विदाई समारोह के दौरान कही, जिसे सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (SCBA) की ओर से आयोजित किया गया था। SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि अयोध्या मामले के निपटारे के लिए जस्टिस बोबडे के प्रयास पर गौर करना चाहिए।

शाहरुख खान भी थे मध्यस्थता के लिए तैयार

विकास सिंह कहा, 'अयोध्या मामले पर मुझे एक खुलासा करना है जो अब तक मेरे और जस्टिस बोबडे के बीच था। उन्होंने एक बार बार मुझसे पूछा था कि क्या शाहरुख खान कमिटी में बतौर मध्यस्थ शामिल हो सकते हैं। जस्टिस बोबडे को पता था कि मैं शाहरुख खान को जानता हूं और इसलिए उन्होंने मुझे उनसे बात करने के लिए कहा था।'  

विकास सिंह ने आगे कहा कि शाहरुख खान भी इसके लिए तैयार थे। उन्होंने कहा, 'शाहरुख खान भी चाहते थे कि मंदिर की आधारशिला मुस्लिम रखें और मस्जिद की हिंदू रखें लेकिन मध्यस्थता प्रक्रिया फेल रही और इसलिए ये योजना भी आगे नहीं बढ़ सकी। इन सबके बावजूद जस्टिस बोबडे द्वारा सांप्रदायिक तनाव को मध्यस्थता के जरिए दूर करने का प्रयास गौर करने लायक है।' 

गौरतलब है कि मध्यस्थता समिति को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने मार्च-2019 में बनाया था। उस समय चीफ जस्टिस रंजन गोगोई थे। पांच जजों की बेंच में जस्टिस बोबडे भी शामिल थे।

विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस बोबडे का शुरू से मानना था कि मध्यस्थता से मसले का हल निकाला जा सकता है। हालांकि, वो प्रक्रिया फेल हुई और इसके बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मामले का हल निकला।

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