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100 पीएसयू को 5 लाख करोड़ में बेचने की तैयारी में सरकार, 70 से अधिक हैं बीमारू

By हरीश गुप्ता | Updated: March 15, 2021 17:55 IST

सरकार ने हालांकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विनिवेश का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ का ही रखा है, लेकिन उसका इरादा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद विनिवेश की गति को बढ़ाने का है. 

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ठळक मुद्देवित्त वर्ष 2021-22 का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ रखा गया है।वित्त वर्ष 2020-21 का लक्ष्य 2.10 लाख करोड़ है।2020-21 के दौरान जुटाए गए 21,300 करोड़ रुपये। 

नई दिल्लीः मोदी सरकार इन दिनों सार्वजनिक क्षेत्र के 100 निर्गमों (पीएसयू) को ह्ल5 लाख करोड़ में बेचने की योजना पर तेजी से काम कर रही है.

इनमें से तकरीबन 70 पीएसयू तो बीमारू हैं. सरकार ने हालांकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विनिवेश का लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ का ही रखा है, लेकिन उसका इरादा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद विनिवेश की गति को बढ़ाने का है. नीति आयोग ने पहले ही 100 पीएसयू के विनिवेश की आक्रामक योजना तैयार की है, जो पहले तय संख्या से ज्यादा है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने नीति आयोग को संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया था. उल्लेखनीय तौर पर सरकार ने ही कुछ प्रमुख क्षेत्रों की बुरी तरह से डूब रही 8 कंपनियों के आधुनिकीकरण के लिए भारी निवेश का फैसला किया है.

यह भी पता चला है कि विनिवेश में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री बाहरी विशेषज्ञों का पैनल बनाने पर विचार कर रहे हैं. अधिकारियों के प्रधानमंत्री के 2017 से संजोये विनिवेश के इरादे को साकार करने में नाकाम रहने के बाद अब काबिल लोगों की तलाश की जा रही है.

प्रधानमंत्री सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में अड़ंगे लगाने का नौकरशाही पर आरोप सार्वजनिक तौर पर लगा चुके हैं. इस बीच नीति आयोग ने निजीकरण के लिए पीएसयू की सूची भी तैयार कर ली है. शुरुआत 2 मई से होने की संभावना है. 

भारी उद्योग और सार्वजनिक निर्गमों के केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर द्वारा लोकसभा में पिछले साल पेश आंकड़ों के मुताबिक 70 बीमारू सीपीएसई वर्ष 2018-19 में ह्ल 31,635 करोड़ के घाटे की वजह बने थे. 70 बीमारू पीएसयू के अलावा सरकार का इरादा बीपीसीएल, शिपिंग कार्पोरेशन, कंटेनर कार्पोरेशन, बीईएमएल, आईटीडीसी, ड्रेजिंग कार्पोरेशन व अन्य में भी अपना निवेश घटाना है.

सरकार ने 8 सीपीएसई, जिसमें बीएसएनल, ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लि., हिंदुस्तान स्टीलवर्क कंस्ट्रक्शन लि., कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लि. शामिल हैं और चार बंद खाद कारखानों के पुनर्जीवन और आधुनिकीकरण के लिए एक लाख करोड़ का भारी निवेश करने का फैसला किया है.

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