लाइव न्यूज़ :

तीन अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को सामाजिक शोध के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

By भाषा | Updated: October 11, 2021 22:28 IST

Open in App

स्टाकहोम, 11 अक्टूबर (एपी) तीन अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को सोमवार को एक अग्रणी शोध के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी। इनमें से एक ने साबित किया कि न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की नियुक्ति में कमी नहीं आती है और प्रवासियों के चलते मूल निवासी श्रमिकों का वेतन कम नहीं होता। ये निष्कर्ष सामान्य धारणा के विपरीत हैं।

इसके अलावा दो अन्य अर्थशास्त्रियों ने इस तरह के सामाजिक मुद्दों का अध्ययन करने का तरीका बताने के लिए नोबेल सम्मान प्राप्त किया।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अर्थशास्त्रियों में बर्कले स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डेविड कार्ड, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के जोशुआ डी. एंग्रिस्ट और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के गुइडो इम्बेन्स शामिल हैं।

कनाडा में जन्मे कार्ड ने अपने शोध में बताया कि न्यूनतम मजदूरी, आव्रजन और शिक्षा श्रम बाजार को कैसे प्रभावित करते हैं, जबकि उसके साथ नोबेल पुरस्कार पाने वाले एंग्रिस्ट और इम्बेन्स ने परंपरागत वैज्ञानिक पद्धतियों पर शोध किया।

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस ने कहा कि तीनों ने ‘‘आर्थिक विज्ञान में अनुभवजन्य कार्य को पूरी तरह से बदल दिया है।’’

आर्थिक विज्ञान समिति के अध्यक्ष पीटर फ्रेड्रिक्सन ने कहा, ‘‘समाज के लिए अहम सवालों के संबंध में कार्ड के अध्ययन और एंग्रिस्ट और इम्बेन्स के पद्धतिगत योगदान से पता चला है कि प्राकृतिक प्रयोग ज्ञान का एक समृद्ध स्रोत हैं।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘उनके शोध ने महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने की हमारी क्षमता में काफी सुधार किया है, जो समाज के लिए बहुत फायदेमंद है।’’

कार्ड ने देखा कि क्या हुआ जब न्यू जर्सी ने न्यूनतम वेतन 4.25 डॉलर से बढ़ाकर 5.05 डॉलर कर दिया। शोध में तुलना समूह के रूप में उन्होंने पूर्वी पेंसिल्वेनिया की सीमा पर स्थित रेस्टोरेंट का उपयोग किया।

पिछले अध्ययनों के विपरीत उन्होंने और उनके दिवंगत शोध साथी एलन क्रुएगर ने पाया कि न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का कर्मचारियों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कार्ड ने बाद में इस मुद्दे पर और काम किया।

नोबेल समिति ने कहा कि कुल मिलाकर शोध का निष्कर्ष यह है कि न्यूनतम वेतन में वृद्धि के नकारात्मक प्रभाव 30 साल पहले की तुलना में काफी कम हैं।

कार्ड ने यह भी पाया कि किसी देश के मूल निवासियों की आय नए प्रवासियों से लाभान्वित हो सकती है।

एंग्रिस्ट और इम्बेन्स ने पद्धति संबंधी मुद्दों पर काम करने के लिए पुरस्कार प्राप्त किया, जिसकी मदद से अर्थशास्त्री कारण और प्रभाव के बारे में ठोस निष्कर्ष निकाल सकते हैं, भले ही वे इसके लिए सख्त वैज्ञानिक तरीकों से अध्ययन न करें।

इम्बेन्स ने मैसाचुसेट्स में अपने घर से फोन पर बात करते हुए संवाददाताओं से कहा कि जब इस बारे में खबर आई, तब वह व्यस्त सप्ताहांत के बाद सो रहे थे। उन्होंने कहा कि वह इस खबर को सुनकर रोमांचित हो गए।

अन्य नोबेल पुरस्कारों के विपरीत अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में स्थापित नहीं किया गया था बल्कि स्वीडिश केंद्रीय बैंक द्वारा 1968 में उनकी स्मृति में इसकी शुरुआत की गई थी, जिसमें पहले विजेता को एक साल बाद चुना गया था। यह प्रत्येक वर्ष घोषित नोबेल का अंतिम पुरस्कार है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

क्रिकेटकेकेआर के लिए सुनील नरेन और वरुण चक्रवर्ती पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच क्यों नहीं खेल रहे हैं? जानें कारण

विश्वखुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी की मौत, इजराइल-अमेरिका ने ईरान किया हमला, 25 मरे?, जवाब में ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागीं

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

कारोबार अधिक खबरें

कारोबाररुपये की तेज छलांग! 2013 के बाद सबसे बड़ा उछाल

कारोबारGold Rate Today: 6 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,51,765 प्रति 10 ग्राम

कारोबारपश्चिम एशिया युद्ध के बीच जमकर गाड़ी खरीद कर लोग?, 2025-26 में 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064?, जानिए दोपहिया वाहनों की संख्या

कारोबारलेह हवाई अड्डाः उड़ान की संख्या 8 से बढ़कर 18 किया?, रिकार्ड संख्या में पर्यटकों के आने के इंतजार में लद्दाख

कारोबारपल-पल बदलते रंग?, मौसम की मार और किसान परेशान?, आखिर क्या करें?