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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: चीनी मुसलमानों के बुरे हाल

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: November 27, 2019 18:13 IST

चीनी सरकार का कहना है कि वह अपनी उइगर जनता को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रही है. उन्हें सभ्य और उन्नत नागरिक बना रही है

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चीन के सिंक्यांग (शिंजियांग) नामक प्रांत में उइगर रहते हैं. ये लोग मुसलमान हैं. वहां चीन की हान जाति के लोग पहले बहुत कम थे लेकिन अब लगभग ढाई करोड़ की आबादी में वे डेढ़ करोड़ हैं और अपने ही प्रांत में उइगर मुसलमान लगभग एक करोड़ ही रह गए हैं.

ये मुसलमान न तो वहां खुलेआम नमाज पढ़ सकते हैं, न मस्जिद में एकत्र हो सकते हैं, न रमजान में रोजा रख सकते हैं, न सलवार-कमीज और तुर्की टोपी पहन सकते हैं और न ही दाढ़ी रख सकते हैं. बुर्के पर रोक है. देखने में ये चीनियों जैसे भी नहीं लगते हैं. ये लोग तुर्की और मध्य एशिया के मुसलमानों की तरह दिखते हैं. इनकी भाषा भी चीनी नहीं है. वह तुर्की और फारसी जैसी है. 

सौ-सवा सौ साल पहले तक सिंक्यांग चीन का हिस्सा नहीं था. अब भी चीन अपने इस सबसे बड़े प्रांत को स्वायत्त क्षेत्न कहता है. इस स्वायत्त क्षेत्न की हालत किसी गुलाम देश से भी बदतर है. यह इलाका चीन के एकदम पश्चिम में है. इसकी सीमाएं आठ देशों को छूती हैं, जिनमें भारत, पाकिस्तान और रूस भी है. लेकिन हमारे इन तीनों देशों की भी बोलती बंद है. ये उइगरों पर हो रहे अत्याचारों पर आंख मींचे रहते हैं. सिर्फ अमेरिका बोलता रहता है. 

इस समय लगभग दस लाख उइगर ‘शिक्षा-शिविरों’ में बंद हैं. उन्हें मंडारिन भाषा सिखाई जा रही है. उन्हें मार-मारकर अपने रीति-रिवाजों से छुटकारा पाना सिखाया जा रहा है. चीनी सरकार का कहना है कि वह अपनी उइगर जनता को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रही है. उन्हें सभ्य और उन्नत नागरिक बना रही है. उन्हें आतंकवाद से दूर रहना सिखा रही है. चीनी सरकार ऐसा सब कुछ इधर पांच-दस साल में इसलिए करने लगी है कि 2009 में एक दंगे के दौरान उइगरों ने 200 चीनियों की हत्या कर दी थी. 

2014 में जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग उरुमची गए थे, उइगरों ने एक रेलवे स्टेशन पर बम लगा दिया था. इस तरह की दर्जनों छोटी-मोटी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. जहां तक भारत, पाक और अफगानिस्तान का सवाल है, इन देशों के अल्पसंख्यकों का हाल चीनी अल्पसंख्यकों के मुकाबले बहुत ज्यादा अच्छा है.

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