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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवसः तकनीक के दम पर दुनिया में आगे बढ़ता भारत 

By देवेंद्र | Updated: May 11, 2026 05:21 IST

National Technology Day: ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया.

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ठळक मुद्देNational Technology Day: भारत में विज्ञान और तकनीक की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है. National Technology Day: परंपरा विकसित की जिसका प्रभाव आगे चलकर वैश्विक विज्ञान पर भी पड़ा.National Technology Day: विज्ञान का विकास औपनिवेशिक जरूरतों तक सीमित होकर रह गया.

National Technology Day: भारत में हर वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है. 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में भारत ने सफल परमाणु परीक्षण किए, जिन्हें ‘पोखरण द्वितीय’ या ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से जाना जाता है. इन परीक्षणों ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत वैज्ञानिक दक्षता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता के मामले में विश्व के प्रमुख देशों की पंक्ति में खड़ा होने की क्षमता रखता है. इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया.

भारत में विज्ञान और तकनीक की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है. प्राचीन भारतीय गणित, चिकित्सा, धातुकर्म और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुके थे. आर्यभट्ट, सुश्रुत, चरक और भास्कराचार्य जैसे विद्वानों ने ज्ञान की ऐसी परंपरा विकसित की जिसका प्रभाव आगे चलकर वैश्विक विज्ञान पर भी पड़ा.

दिल्ली का लौह स्तंभ भारतीय धातुकर्म की उन्नत तकनीक का उदाहरण है, जिसकी जंगरोधी संरचना आज भी वैज्ञानिकों के अध्ययन का विषय बनी हुई है. आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक चिंतन का महत्वपूर्ण आधार रहा है. हालांकि औपनिवेशिक काल में भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की उपेक्षा हुई और विज्ञान का विकास औपनिवेशिक जरूरतों तक सीमित होकर रह गया.

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को राष्ट्र निर्माण का आधार बनाया. प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आधुनिक भारत की आवश्यकता माना. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, परमाणु ऊर्जा आयोग, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद जैसे संस्थानों की स्थापना इसी सोच का परिणाम थी.

सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया. यही आधार आगे चलकर अंतरिक्ष, रक्षा और डिजिटल तकनीक में भारत की उपलब्धियों का कारण बना. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का महत्व केवल परमाणु परीक्षणों तक सीमित नहीं है. 11 मई 1998 को ही भारत ने स्वदेशी विमान ‘हंसा 3’ का सफल परीक्षण किया था और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ‘त्रिशूल’ मिसाइल का भी परीक्षण किया.  

टॅग्स :National Technology Advisory GroupAtal Bihari Vajpayee
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