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ब्लॉग: भारत के प्रति नहीं बदला है पाक का रवैया

By शोभना जैन | Updated: January 21, 2022 09:37 IST

पाकिस्तान के पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति नीति के इसी वक्त जारी होने के समय के पीछे एक बड़ी वजह पाकिस्तान में अभूतपूर्व महंगाई की मार से त्रस्त पाकिस्तानियों का मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाना भी माना जा रहा है लेकिन पाकिस्तान इस नीति की खास बात यह बता रहा है कि आर्थिक सुरक्षा के जरिये ही देश के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाया जा सकता है.

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ठळक मुद्देपाकिस्तान सरकार ने गत 15 जनवरी को अपनी पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति 2022-2026 जारी की.इस नीति में पहली बार देश की आर्थिक स्थिरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम पहलू माना गया.इसकी एक बड़ी वजह महंगाई की मार से त्रस्त पाकिस्तानियों का मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाना भी माना.जा रहा है

पाकिस्तान बनने के 75 वर्ष बाद आखिरकार पाकिस्तान सरकार ने गत 15 जनवरी को अपनी पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति 2022-2026 जारी की और इसके कुछ अहम हिस्सों को सार्वजनिक किया. 

इस नीति के इसी वक्त जारी होने के समय के पीछे हालांकि एक बड़ी वजह पाकिस्तान में अभूतपूर्व महंगाई की मार से त्रस्त पाकिस्तानियों का मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाना भी माना जा रहा है लेकिन पाकिस्तान इस नीति की खास बात यह बता रहा है कि आर्थिक सुरक्षा के जरिये ही देश के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाया जा सकता है. 

इस नीति में पहली बार देश की आर्थिक स्थिरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम पहलू माना गया, लेकिन देखा जाए तो यह पाकिस्तान की सुरक्षा नीति कम और आंतरिक नीति एवं कूटनीति ही ज्यादा लगती है, जिसके जरिये वह अपनी जनता के साथ साथ विश्व बिरादरी में भी अपनी छवि कुछ बेहतर करना चाहता है.

अगर इस सुरक्षा नीति में भारत की बात करें और इस से जुड़े पाकिस्तान के अब तक के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो इस नीति में अन्य किसी भी देश की तुलना में भारत का सबसे ज्यादा यानी पंद्रह बार से भी ज्यादा जिक्र है.

भले ही दस्तावेज में कहा गया है कि पाकिस्तान देश तथा विदेश में अपनी शांति नीति के तहत भारत के साथ अपने रिश्ते सुधारना चाहता है लेकिन नीति में जिस तरीके से भारत का जिक्र किया गया है, उस से भारत के प्रति उसकी इस शांति प्रिय पड़ोसी बनने की सदिच्छा या यूं कहें दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में ‘भारत की ओर से मौजूद खतरों में भ्रामक जानकारी फैलाने, हिंदुत्व और घरेलू राजनीति में लाभ पाने के लिए आक्रामक नीति आजमाने’ की जिस तरीके से बात की गई है, उससे साफ है कि आतंकवाद की धुरी रहा पाकिस्तान अभी भी नहीं सुधरा है.

राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में पाकिस्तान ने जिस तरीके से जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया है और इसमें जम्मू-कश्मीर को लेकर अलग खंड रखा गया है, उससे साफ जाहिर है कि जम्मू-कश्मीर का भावनात्मक मुद्दा उछाल कर इमरान सरकार अपनी जनता का ध्यान बेरोजगारी और मंहगाई से हटाना चाहती है. 

अपने देश की जनता को इस मसले पर भड़काने के साथ ही वह जम्मू-कश्मीर में हिंसा और उग्रवाद भड़काने का एजेंडा जारी रखने की अपनी नापाक नीयत उजागर कर रही है.

अपनी सुरक्षा नीति के जरिये पाकिस्तान दुनिया को संदेश देना चाहता है कि अब वह आतंकवाद समर्थित राष्ट्र की जगह अपनी आर्थिक व्यवस्था पर ध्यान देगा. 

वैसे ऐसे दौर में जबकि पाकिस्तान आतंकवाद, आतंकवादी गुटों को फंडिंग देने, वित्तीय पोषण करने की वजह से वैश्विक वित्तीय कार्य बल एफएटीएफ की ग्रे सूची में बना हुआ है, ऐसे में उसने आतंकवाद, आतंकवादी गुटों से निपटने के लिए इस नीति में देश के आंतरिक सुरक्षा माहौल को और सुधारने की प्रक्रिया जारी रखने की अनेक प्राथमिकताओं की भी बात कही है. 

दरअसल, इस समय पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था बेहद बुरे दौर में है, राजनैतिक उथल-पुथल है, उसकी अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज पर आश्रित है. अफगानिस्तान में तालिबान के समर्थन के बाद अब वह पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है. वह दुनिया से अलग-थलग पड़ चुका है. 

आतंकवाद को पालने-पोसने को लेकर अंतरराष्ट्रीय फंडिंग करने वाली एजेंसियां भी फंडिंग रोकने का दबाव डालती रही हैं. तालिबान को खुले समर्थन के बाद अमेरिका समेत पश्चिमी देश पाकिस्तान से दूर हो रहे हैं. 

चीन भी अपने सामरिक हितों की वजह से ही उस के साथ खड़ा नजर आ रहा है. इस नीति में चीन का जिस तरह से बेहद संक्षिप्त लेकिन जैसे शब्दों में उल्लेख किया गया है, वह ध्यान देने योग्य है. कुछ पर्दादारी की वजह से इसमें महज यह कहा गया कि पाकिस्तान के चीन के साथ गहरे ऐतिहासिक रिश्ते साझे हितों और आपसी समझ पर आधारित हैं. 

इमरान खान ने कहा है कि इस राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का पूरा ध्यान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर है, विदेश नीति में भी आर्थिक कूटनीति को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा, सबसे बड़ी सुरक्षा यह है कि लोग देश के लिए खड़े हों, समावेशी विकास के जरिये यह स्थिति उत्पन्न की जा सकती है. 

लेकिन क्या पाकिस्तान का सैन्य तंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था इसे अंजाम देगी. उन्होंने कहा कि यह नीति सैन्य और नागरिक प्रशासन की सहमति से तैयार की गई है. यह नीति वर्ष 2014 से तैयार की जा रही है. 

दिसंबर, 2021 में इस नीति को कैबिनेट की मंजूरी दी गई थी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने भी इस पर मुहर लगा दी है. लेकिन कुल मिला कर देखें तो नीति का पाकिस्तान के आज के हालात में जारी होना सवाल तो उठाता है. कुल मिला कर देखें तो राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में जिस तरह से भारत का उल्लेख है, वह पाकिस्तान के अब तक के रवैये का ही सूचक है और उसके भारत के प्रति दृष्टिकोण में किसी भी तरह का बदलाव नहीं है. 

इस सुरक्षा नीति में भले ही पहली बार देश की आर्थिक स्थिरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम पहलू मानते हुए स्वीकार किया गया हो कि आर्थिक सुरक्षा के जरिये ही देश के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाया जा सकता है लेकिन फिलहाल तो यह सिर्फ देश की घरेलू राजनीति को ध्यान में रख कर, आर्थिक बदहाली के दौर में जनता को सपने दिखाने का प्रयास ही लगता है.

टॅग्स :पाकिस्तानभारतजम्मू कश्मीरटेरर फंडिंगइमरान खान
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