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चीन की घेराबंदी लगातार भारत के लिए होती जा रही चुनौतीपूर्ण, उसकी पॉलिसी पड़ सकती है भारी

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: September 18, 2018 10:47 IST

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 39वीं बैठक में चीन की इन नीतियों और कदम के खिलाफ भारत ने जोरदार आपत्ति दर्ज कराई है।

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उमेश चतुर्वेदी

चीन द्वारा की जा रही चौतरफा घेराबंदी भारत के लिए लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। चूंकि भारत की रणनीति पड़ोसियों से अच्छे संबंध बनाकर रखने की रही है, इसलिए वह अपनी तरफ से आक्रामक कदम उठाने से बचता है। लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन  भारत को घेरने के लिए वन बेल्ट वन रोड नीति के तहत पाकिस्तान को तमाम सहायताएं मुहैया करा रहा है।

चीन पाकिस्तान में आर्थिक कॉरीडोर का निर्माण कर रहा है, जो पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित, अक्साई चिन जैसे इलाकों से गुजर रहा है। भारत ने इसके खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। भारत ब्रिक्स के मंच पर चीन को इसके लिए पहले भी आगाह कर चुका है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 39वीं बैठक में चीन की इन नीतियों और कदम के खिलाफ भारत ने जोरदार आपत्ति दर्ज कराई है। परिषद में भारत के राजदूत वीरेंद्र पॉल ने न सिर्फ चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना, बल्कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर के साथ ही चीन की सहायता से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बन रहे बांध पर भी विरोध जताया है।

14 सितंबर को हुई बैठक में पॉल ने साफ कहा कि अपनी संप्रभुता और क्षेत्नीय अखंडता पर खतरे वाली किसी भी परियोजना को लेकर कोई भी देश चुप्पी नहीं साध सकता। पॉल ने साफ किया कि भारत किसी के दबाव में नहीं झुकेगा और अपनी अखंडता को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। भारत ने इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच से अपनी क्षेत्नीय अखंडता और संप्रभुता पर खतरे की बात उठाकर एक तरह से चीन के खिलाफ विश्व जनमत के सामने उसकी नीतियों का खुलासा ही किया है। भारत की घेराबंदी के लिए जिस तरह चीन कोशिश कर रहा है, उससे अमेरिका के एक राजनयिक को लगने लगा है कि शीतयुद्ध के दिनों की वापसी हो रही है। तब पहले शीतयुद्ध की छाया पूरी दुनिया पर थी, लेकिन अब इसका ज्यादा खतरा एशिया पर है।

11 हजार 200 अरब डॉलर की जीडीपी वाली दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की कोशिश भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर लगातार घेरने की है। वह भारत के बिल्कुल पड़ोस में स्थित पाकिस्तान, नेपाल और मालदीव पर अपना प्रभाव बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। इससे भारत को सतर्क रहना होगा।

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