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विष्णुगुप्त का ब्लॉग: चीन के युद्धोन्माद से रहें सावधान

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 10, 2019 08:02 IST

निश्चित तौर पर चीन एक महाशक्ति है, सिर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं बल्कि सामरिक तौर पर भी। चीन दुनिया की कूटनीतिक प्रतिक्रिया की भी परवाह नहीं करता है।

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चीन का युद्धोन्माद यदा-कदा दुनिया के सामने आता ही रहता है, कभी अपनी अराजक सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के तौर पर चीन दुनिया को डराता है तो कभी युद्ध की धमकी देकर दुनिया को भयभीत करता है। पड़ोसी देश जैसे वियतनाम, ताइवान, भूटान तो चीन की अराजक हिंसक सामरिक शक्ति के सामने डरे हुए रहते हैं और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए चिंतित भी रहते हैं। चीन कब पड़ोसी देशों की सीमाओं का अतिक्र मण कर कब्जा जमा बैठे और अपनी सेना की तैनाती कर दे, कहा नहीं जा सकता है। 

निश्चित तौर पर चीन एक महाशक्ति है, सिर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं बल्कि सामरिक तौर पर भी। चीन दुनिया की कूटनीतिक प्रतिक्रिया की भी परवाह नहीं करता है। कुछ दिन पूर्व ही इंटरपोल प्रमुख के लापता होने की खबर दुनिया भर में फैली थी।  बाद में पता चला कि इंटरपोल का वह प्रमुख चीन के कब्जे में है। चीन ने दुनिया को यह बताने की जरूरत भी नहीं समझी थी कि उसने इंटरपोल के प्रमुख को क्यों और कैसे अपने कब्जे में रखा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने नागरिकों को चीन जाने से मना किया है। अमेरिका और चीन के बीच में ट्रेड वार कितना गंभीर और खतरनाक रहा है, यह जगजाहिर है। 

भारत के सामने चीनी युद्धोन्माद की भयंकर चुनौतियां खड़ी हैं। भारत वियतनाम में कई तेल कुओं के उत्खनन कार्य सहित अन्य विकास योजनाओं में भी भागीदार है। वियतनाम में भारत की भागीदारी को लेकर चीन बार-बार आंखें तरेरता है, भारत को डराता-धमकाता है। डोकलाम में चीन को जैसे को तैसे के रूप में जवाब मिला था।

 फिर भी भारत को सीमा पर अपनी सैन्य शक्ति मजबूत करनी ही होगी। हमारा असली दुश्मन चीन ही है, चीन की गिद्ध दृष्टि से हमारी संप्रभुता को खतरा है। चीन के युद्धोन्माद से जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, फिलीपींस, कबोंडिया जैसे देशों को भी सावधान रहना चाहिए। खासकर अमेरिका को भी चीन के युद्धोन्माद पर नजर डालनी होगी। 

अफ्रीका महादेश में तानाशाही और अंधेरगर्दी पसारने में चीन की बड़ी खतरनाक भूमिका रही है। चीन के युद्धोन्माद को जमींदोज करने का सही तरीका है व्यापार संतुलन सुनिश्चित करना। चीन के साथ पड़ोसी देशों का व्यापार संतुलन सुनिश्चित होगा, तब चीन की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। ऐसी स्थिति में चीन का युद्धोन्माद खुद ही जमींदोज हो जाएगा।

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