लाइव न्यूज़ :

शशिधर खान का ब्लॉग: बहुत कमजोर हो जाएगा आरटीआई 

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 1, 2019 17:18 IST

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार केंद्रीय सूचना आयुक्तों को आरटीआई का ‘अभिभावक’ कहा है. जनता को मौलिक अधिकार देनेवाला ऐसा एकमात्र कानून है आरटीआई, जिसमें बदलाव नहीं किया जा सकता.

Open in App

शशिधर खान 

केंद्रीय सूचना आयोग के बारे में संसद में दिए गए सरकार के बयानों से आम मतदाता दिग्भ्रमित हैं. सूचना अधिकार अधिनियम 2005 में संशोधन बिल लोकसभा और राज्यसभा से जैसी अफरातफरी तथा भारी तमाशे के बीच पारित कराया गया, उसे तो संसद सत्र समाप्त होने के बाद लोग भूल जाएंगे, मगर जिस बात को लेकर बहस जारी रहेगी वो ये है कि अब केंद्रीय सूचना आयोग की हैसियत क्या रह जाएगी. 

सरकार ने सदस्यों के जबर्दस्त विरोध की बिल्कुल अनदेखी करते हुए सदन को सीआईसी की स्वायत्तता का भरोसा दिलाया, जो सरकारी नियंत्रण वाला प्रावधान है. वर्तमान आरटीआई एक्ट (संशोधन) बिल, 2019 के अनुसार भाजपा गठजोड़ सरकार ने आरटीआई एक्ट, 2005 के अनुच्छेछ 13, 16 और 27 को बदल दिया. 

बिल पेश करनेवाले पीएमओ राज्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन से केंद्रीय सूचना आयुक्तों का दर्जा चुनाव आयुक्तों वाला और राज्य सूचना आयुक्तों का दर्जा राज्यों के मुख्य सचिवों के समकक्ष हो जाएगा. सरकार की सबसे कमाल की दलील है सूचना आयुक्तों के कार्यकाल, वेतन और भत्ते की समीक्षा का अधिकार अपने हाथ में ले लेना. यह संविधान के संघीय ढांचे पर भी खतरा है. क्योंकि राज्य निर्वाचन आयुक्तों और सूचना आयुक्तों का वेतन, भत्ता राज्य सरकारों का महकमा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार केंद्रीय सूचना आयुक्तों को आरटीआई का ‘अभिभावक’ कहा है. जनता को मौलिक अधिकार देनेवाला ऐसा एकमात्र कानून है आरटीआई, जिसमें बदलाव नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने आरटीआई को धारा-19 के अंतर्गत आनेवाले स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार का हिस्सा बताया है. 

अब सूचना आयुक्त अपनी नौकरी बचाएंगे कि जनता के मौलिक अधिकार की रक्षा करेंगे. मनमोहन सिंह सरकार को घोटालों में सराबोर और खुद को घोटाले से मुक्त होने का दावा करनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले ही शासनकाल में आरटीआई का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त करना चाहते थे. 2018 में यह संशोधन लाने की तैयारी हो चुकी थी. 

सरकार आरटीआई (संशोधन) बिल को संसदीय समिति में न जाने देने पर अड़ी रही. जबकि विपक्षी दल उन विसंगतियों पर चर्चा कराने पर जोर दे रहे थे, जो इस सरकार ने पैदा की है. वाजपेयी शासनकाल में व्यापक विचार-विमर्श के बाद इसका मसौदा तैयार हुआ था. मनमोहन सिंह सरकार ने भी संसदीय समिति गठित की. नरेंद्र मोदी सरकार ने सीआईसी को अपने नियंत्रण में लेकर ‘स्वतंत्र अस्तित्व’ प्रदान करनेवाले संशोधन पर संसद में बहस की जरूरत नहीं समझी. 

टॅग्स :आरटीआईसंसद
Open in App

संबंधित खबरें

भारतNari Shakti Vandan: महिला आरक्षण बिल पर समर्थन?, कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने कहा- परिसीमन प्रावधान के खिलाफ एकजुट होकर करेंगे वोट, वीडियो

भारतकेरलम-तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव और 2000 किमी दूर भोपाल में राजनीति?, मप्र में 230 विधायक और जीतने के लिए चाहिए 58 वोट, क्यों राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल

भारतलोकसभा-विधानसभा में महिला आरक्षणः 50 प्रतिशत नहीं तो 33 प्रतिशत ही सही, बसपा प्रमुख मायावती ने कहा-हम बीजेपी के साथ?

भारत16 से 18 अप्रैल तक संसद में रहिए उपस्थित, कांग्रेस, जदयू और एलजेपी (रामविलास) ने जारी किया व्हिप

भारतकौन हैं मानस रंजन मंगराज?, सस्मित पात्रा की जगह होंगे राज्यसभा में बीजेडी संसदीय दल नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक सुलता देव, नवीन पटनायक ने किया बदलाव?

भारत अधिक खबरें

भारतकान खोल के सुन लो?, भारत की भूमि पर कोई माई का लाल बाबरी मस्जिद नहीं बना पाएगा?, बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह की बड़ी चेतावनी, वीडियो

भारतNari Shakti Vandan Sammelan: 16 अप्रैल को एक साथ होली-दिवाली?, 10वीं-12वीं की टॉपर छात्राओं को सीएम डॉ. मोहन ने किया सम्मानित, देखिए तस्वीरें

भारतकौन हैं विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव?, क्यों नीतीश कुमार करते हैं सबसे अधिक भरोसा?, वीडियो

भारतबिहार सरकार बंटवाराः गृह समेत 29 विभाग सम्राट चौधरी के पास, विजय कुमार चौधरी के पास 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 8, देखिए लिस्ट

भारतCBSE 10th Result 2026: 93.7 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए, CBSE 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी, यहां पर करिए चेक?