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ब्लॉग: नगा संकट अब अंतिम समाधान की ओर!

By शशिधर खान | Updated: April 30, 2022 08:52 IST

1997 में ही सबसे मजबूत और संगठित नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन - आइसाक मुइवा आईएम गुट) से केंद्र का संघर्ष विराम समझौता हुआ और अभी तक वार्ताओें के सारे दौर बेनतीजा साबित हुए. 

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ठळक मुद्देकेंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकार अक्षय कुमार मिश्र की सभी नगा गुटों से लगातार बातचीत जारी है. 2015 में नगा गुट से एक ‘फ्रेमवर्क डील’ हुआ मगर कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला.अक्षय मिश्र से पहले के वार्ताकार आरएन रवि भी आईबी स्पेशल डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे.

भारत और लगभग विश्व के सबसे पुराने पेचीदा नगा संकट के अंतिम समाधान की ठोस पहल चल रही है. केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार अक्षय कुमार मिश्र की सभी नगा गुटों समेत नगा सिविल सोसायटी और नगालैंड सरकार से भी लगातार बातचीत जारी है. 

इतना गंभीर प्रयास 1997 के बाद से पहली बार किया जा रहा है. 1997 में ही सबसे मजबूत और संगठित नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन - आइसाक मुइवा आईएम गुट) से केंद्र का संघर्ष विराम समझौता हुआ और अभी तक वार्ताओें के सारे दौर बेनतीजा साबित हुए. 

2015 में इस नगा गुट से एक ‘फ्रेमवर्क डील’ हुआ और उसके बाद भी वार्ता जारी रही, मगर कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला. केंद्र के वार्ताकार अक्षय मिश्र हाल ही में एनएससीएन (आईएम) के दीमापुर के निकट स्थित कैंप हेब्रन हेडक्वार्टर में इसके महासचिव, टी- मुइवा समेत अन्य विद्रोही नगा संगठनों से भी मिले. 

यह पहला अवसर था, जब केंद्र के किसी वार्ताकार ने एनएससीएन (आईएम) के भूमिगत अड्डे में जाकर सभी विद्रोही नेताओं से मुलाकात की. मिश्र ने मुलाकातों का सिलसिला जारी रखा हुआ है और इससे सभी नगा गुट आशावान हैं. 

सबसे ज्यादा हार्डलाइनर एनएससीएन (आईएम) की स्वयंभू समानांतर भूमिगत फेडरल गवर्नमेंट ऑफ नगालिम के होम किलोन्सेर (गृह मंत्री) एम. डैनियल लोथा ने नगालैंड की राजधानी कोहिमा में 29-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्र के वार्ताकार से 23 अप्रैल को तीसरी बातचीत के बाद कहा - ‘‘अक्षय मिश्र ने आश्वस्त किया कि वे इस संकट का अंतिम हल निकालने का एजेंडा लेकर आए हैं.’’ 

एनएससीएन (आईएम) के एक नेता ने 19 अप्रैल को हेब्रन हेडक्वार्टर में बातचीत के बाद कहा - ‘‘एके मिश्र के साथ यह अनौपचारिक मुलाकात इस मायने में सार्थक और महत्वपूर्ण है, क्योंकि पहली बार केंद्र से किसी वार्ताकार ने हमारे हेडक्वार्टर में आकर हम लोगों से बातचीत की है.’’ 

गौरतलब है कि एनएससीएन (आईएम) भारत सरकार के समानांतर ‘आजाद संप्रभु’ नगालिम सरकार का स्वयंभू सर्वेसर्वा खुद को मानता है. अभी तक की वार्ता के बेनतीजा होने का असली कारण इस गुट का यही अड़ियल रवैया है. 

एनएससीएन (आईएम) सुप्रीमो और स्वयंभू नगालिम ‘प्रधानमंत्री’ मुइवा ‘अलग संविधान तथा अलग झंडा’ वाले मुद्दे पर समझौता करने को तैयार नहीं हुआ. नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप (एनएनपीजी) के बैनर तले आनेवाले सात नगा गुट इस अड़ंगा वाले बिंदु पर लचीला रवैया अपनाने के पक्ष में हैं. लेकिन यह मंच एनएससीएन (आईएम) की सहमति के बगैर समझौता नहीं चाहता. 

एनएनपीजी गुटों के साथ भी केंद्र का संघर्षविराम समझौता चल रहा है. अक्षय मिश्र की हेब्रन मुलाकात के अगले दिन केंद्र ने एनएनपीजी के तीन नगा गुटों के साथ संघर्षविराम की अवधि एक साल के लिए बढ़ाई. यह भी अच्छा संकेत है कि केंद्र के वार्ताकार ने सभी नगा गुटों से एक साथ मुलाकात की. 

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर अक्षय मिश्र नगा वार्ताकार बनाए जाने के बाद 15 अक्तूबर 2021 को एनएनपीजी के सातों गुटों से पहली बार दिल्ली में मिले.

अक्षय मिश्र से पहले के वार्ताकार आरएन रवि भी आईबी स्पेशल डायरेक्टर पद से रिटायर हुए थे. आरएन रवि उसके बाद नगालैंड के राज्यपाल बनाए गए. राज्यपाल के रूप में आरएन रवि ने कथित तौर पर 31 अक्तूबर 2019 तक हर हाल में अंतिम समाधान निकालने की डेडलाइन तय कर दी, चाहे एनएससीएन (आईएम) की और नगालैंड सरकार की भी सहमति हो या नहीं. 

आरएन रवि को नगालैंड से हटाकर तमिलनाडु भेज दिया गया और अक्षय मिश्र ने वार्ता की कमान संभाली. कहा जाता है कि आरएन रवि के आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) के तहत सेना की चौकसी बढ़ाने पर एनएससीएन (आईएम) ने नाराजगी जताकर वार्ता बंद कर दी और संघर्षविराम से भी मुकरने की धमकी दी. 

इसी आधार पर एनएससीएन के दबाव में आरएन रवि को हटाया गया. नगा समाधान के आरएन रवि के तरीके से नगालैंड सरकार सहमत नहीं थी. अभी अच्छे माहौल में निर्णायक दौर की मुलाकातें अक्षय मिश्र ने शुरू की हैं क्योंकि 31 मार्च को केंद्र सरकार ने असम, नगालैंड और मणिपुर के कई जिलों से अफ्स्पा हटा लिया. 

असम और मेघालय के 50 साल पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के अवसर पर यह ऐलान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि समूचे पूर्वोत्तर को ‘झंझट मुक्त’क्षेत्र बनाने की दिशा में यह कदम उठाया गया है. पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्री काफी समय से अफ्स्पा हटाने की मांग कर रहे थे. सबसे ज्यादा नगालैंड, मणिपुर और असम से मांग की जा रही थी.

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