भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है। जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया है। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 में की गई थी। इसके तल्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत हैं। आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। Read More
संजय सिंह ने आगे कहा कि जब बैलट पेपर से वोटिंग होती थी तो अगले दिन सुबह अखबारों में खबरें आ जाती थी कि कितना प्रतिशत मतदान हुआ। सारी मीडिया और दिल्ली इस बात का इंतजार कर रही है कि आखिर दिल्ली में कितना प्रतिशत मतदान हुआ है। ...
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए शनिवार को मतदान संपन्न होने के बाद चुनाव अधिकारियों ने कहा था कि 61.46 फीसद मतदान हुआ जिसमें संशोधन भी संभव है। लेकिन जब रविवार चार बजे तक चुनाव आयोग से मतदान प्रतिशत के बारे में कोई बयान नहीं आया तब आप प्रमुख व मुख ...
चुनाव आयोग ने यह आंकड़े आम आदमी पार्टी के आरोपों के बीच जारी किया। बल्लीमारान सीट पर सबसे अधिक वोट 71.61 पड़े। दिल्ली कैंट सीट पर सबसे कम 45.4 फीसदी मतदान हुआ। ...
चुनाव आयोग द्वारा दिल्ली विधानसभा चुनाव के अंतिम मतदान प्रतिशत के ऐलान में देरी को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने “ पूरी तरह चौंकाने वाला” करार देते हुए रविवार को सवाल किया कि मतदान खत्म होने के कई घंटों बाद भी आयोग आकंड़े जारी क्यों नहीं कर रहा है? ...
पेश है दिल्ली विधानसभा चुनाव के विभिन्न पहलुओं पर राजनीतिक विश्लेषक और ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी' 'सीएसडीएस' के निदेशक संजय कुमार से ‘‘भाषा’’ के पांच सवाल और उनके जवाब : ...
Delhi Election 2020: दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए 61.46 फीसदी मतदान हुआ। यह 2015 में हुए चुनाव के 67.47 फीसदी मत प्रतिशत से कम है। एग्जिट पोल की मानें तो विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली आप को आसान जीत मिलती दिख रही है। ...
यह बात सही है कि भारत के चुनावों में बाहुबल एवं धनबल का प्रभाव रहा है. 1980-90 के दशक के चुनाव बाहुबलियों एवं धनबलियों के प्रभाव से इतने डरावने हो गए थे कि सज्जन लोग चुनाव लड़ने तक से डरने लगे थे. हालांकि आज का सच वह नहीं है. 1993 के बाद से चुनाव आयो ...
हमें समझना होगा कि लोगों की भावनाओं को भड़काने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है. बल्कि इस चक्कर में विकास के मुद्दे हाशिये पर चले जाते हैं. लोगों को सतत भय के माहौल में रखना और उनकी भावनाएं भड़काना हम वहन नहीं कर सकते. ...