एक स्वतंत्र और निडर न्यायपालिका महत्वपूर्ण है जो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती है। इसके बिना संविधान निर्जीव दस्तावेज की तरह हो जाएगा, बिना आत्मा के शरीर जैसा। कानून के अनुसार न्याय देने में, अदालत का कार्य कार्यपालिका के अतिरेक की निगरानी कर विधाय ...
इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि खुले में न्याय की अवधारणा पहली बार ईसा पूर्व तीसरी सदी में जिस भारतभूमि में आई थी, उसे यहां लागू होने के लिए इक्कीसवीं सदी तक इंतजार करना पड़ा। ...
सुनंदा पुष्कर मर्डर केस की शनिवार को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कांग्रेस नेता और सुनंदा पुष्कर के पति शशि थरूर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट की ओर से नियमित जमानत दे दी गई है। ...
किसी भी शक्तिशाली और संपन्न राष्ट्र की अदालतें विदेशी भाषा में काम नहीं करतीं लेकिन भारत की तरह जो पूर्व गुलाम देश हैं, उनके कानून विदेशी भाषाओं में बनते हैं और मुकदमों की बहस और फैसले भी विदेशी भाषा में होते हैं जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, ...
न्यायाधीश और उनकी पत्नी ने अपनी बेटी से मारपीट भी की और उसकी चीखों को फोन पर बंसल को सुनाया गया। प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेने के बाद मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि ''हम काफी शर्मिंदा ...
प्रसाद का कहना है कि इन अदालतों में केवल रेप के ही मामलों की सुनवाई होगी। पॉस्को कोर्ट्स में इस वक्त काम का बड़ा दबाव है। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में रेप की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। ...