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Parliament Special Session: 3 बिल पेश?, महिला आरक्षण-परिसीमन विधेयक पर बहस शुरू, वीडियो

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 16, 2026 11:50 IST

Parliament Special Session: प्रधानमंत्री ने ये करके दिखाया है। पहले 13-14% महिलाएं सदन में थी आज 33% हो जाएंगे। 816 में से 273 सीट पर महिला जीत कर आएगी।

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ठळक मुद्देParliament Special Session: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने डिलिमिटेशन बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा है।Parliament Special Session: वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।Parliament Special Session: लाडकी बहन को सशक्त करना चाहिए, सुरक्षित करना चाहिए।

नई दिल्लीः कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा केंद्रीय गृह मंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने डिलिमिटेशन बिल, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा है। लोकसभा में भाजपा की तरफ से चर्चा की शुरुआत कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल करेंगे। स्पीकर्स में सांसद बांसुरी स्वराज, रक्षा खडसे, अपराजिता सारंगी, कंगना रनौत और धर्मशीला गुप्ता शामिल होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज दोपहर करीब 3 PM बजे सदन को संबोधित करने की उम्मीद है।

विपक्षी पार्टी के नेता संसद के विशेष सत्र की रणनीति पर चर्चा करने के लिए संसद परिसर में मिले, जिसमें महिला आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल पर फोकस किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह ने भाजपा सांसदों के साथ, संसद में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का स्वागत किया।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और डिलिमिटेशन बिल, 2026 को पेश करने का विरोध किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल बिलों की मेरिट पर बात नहीं कर सकते, और वे बिलों को पेश करने पर सिर्फ़ टेक्निकल ऑब्जेक्शन उठा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ रही है। उनकी यह टिप्पणी विशेष सत्र शुरू होने से पहले आयी, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन कर इसे 2029 से लागू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन(ललन) सिंह ने नारी वंदन शक्ति अधिनियम पर कहा, "...प्रधानमंत्री ये चाहते हैं कि 2029 के चुनाव में इसे लागू किया जाए। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ये बहुत बड़ा कदम है। इस देश में महिलाओं की 50% की आबादी है और यदि उस 50% की आबादी को न्याय देने का प्रयास किया जा रहा है तो उसका विरोध नहीं होना चाहिए। हम विपक्ष से आग्रह करेंगे कि विपक्ष सर्वसम्मित से इस बिल को पास करे।"

लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, "हम संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 और डिलिमिटेशन बिल, 2026 का विरोध करते हैं...कोई दूसरी पार्टी नहीं है जो महिला आरक्षण की इतनी बड़ी समर्थक हो।"

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है और इनका प्रभाव बेहद व्यापक और नुकसानदेह है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इन्हें उनके वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।

JDU सांसद संजय कुमार झा ने कहा, "महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पास हो गया था, अब वे विरोध क्यों कर रहे हैं? हमारी पार्टी तो इसका शुरू से ही समर्थन करती है, नीतीश कुमार तो इसके पक्ष में ही रहे... सभी को एक व्यक्ति एक वोट का अधिकार है..." प्रस्तावित परिसीमन बिल पर उन्होंने कहा, "कैसे दक्षिण और उत्तर भारत के बीच की खाई बढ़ सकती है? 50% तो हर राज्य में बढ़ोतरी हो रही है... मुझे लगता है कि उन्हें(विपक्ष) बस महिला आरक्षण बिल का विरोध करना है इसलिए सारा प्रपंच रच रहे हैं।"

महिला आरक्षण बिल पर शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा, "आज इतिहास बनने जा रहा है। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभिनंदन देना चाहते हैं क्योंकि एक पुरुष ने ठान लिया कि महिलाओं को सशक्त कर रहे हैं। हमारे नेता एक नाथ शिंदे ने हमेशा माना है कि लाडकी बहन को सशक्त करना चाहिए, सुरक्षित करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने ये करके दिखाया है।

पहले 13-14% महिलाएं सदन में थी आज 33% हो जाएंगे। 816 में से 273 सीट पर महिला जीत कर आएगी।" सपा सांसद डिंपल यादव ने नारी वंदन शक्ति अधिनियम पर कहा, "...सरकार की नीयत पर प्रश्नचिन्ह है क्योंकि जब यह बिल पास हुआ था तब कहा गया था कि पहले जनगणना करवाएंगे और फिर परिसीमन होगा और उसी के आधार पर महिलाओं के लिए क्षेत्र बना पाएंगे।

लेकिन पहले ही पायदान को नजरअंदाज किया जा रहा है... जिस स्वरूप में इस बिल को लाना चाहिए था उस रूप में इसे नहीं लाया जा रहा है बल्कि मनमुताबिक तरीके से इसे लाया जा रहा है... हमारी मांग है कि हमारे पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण मिले..." प्रस्तावित परिसीमन बिल पर उन्होंने कहा, "...कहीं न कहीं जो छोटे प्रांत है, दक्षिण भारत के राज्य हैं उनका वर्चस्व घटेगा... इनकी जो भूमिका सरकार बनाने में या अपने राज्यों में फंड पहुंचाने में, कही न कही उसे भी क्षति पहुंचेगी।"

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