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UP Assembly Bypolls: कटेहरी और मझवां सीट नहीं देंगे?, भाजपा नेतृत्व ने ठुकराई संजय निषाद की मांग!, अब आगे क्या करेंगे निषाद पार्टी के मुखिया

By राजेंद्र कुमार | Updated: October 23, 2024 18:32 IST

UP Assembly Bypolls: संजय निषाद की उक्त मांग को सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पहले ही ठुकरा चुके थे.

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ठळक मुद्देआठ सीटों पर भाजपा के और एक सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा. अंबेडकरनगर की कटेहरी और मिर्जापुर की मझवां सीट भाजपा के निषाद पार्टी के लिए छोड़ी थी. कटहरी सीट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार चुनाव हार गए थे.

UP Assembly Bypolls: उत्तर प्रदेश की नौ सीटों पर हो रहे उपचुनाव में योगी सरकार ने सहयोगी दलों को एक सीट देने के फार्मूला पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व ने एक बार फिर अपनी मोहर लगा दी है. यूपी में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद बीते चार दिनों से दिल्ली में डेरा जमा कर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उपचुनाव में अंबेडकरनगर की कटेहरी और मिर्जापुर की मझवां सीट दिए जाने की मांग कर रहे थे. संजय निषाद की उक्त मांग को सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पहले ही ठुकरा चुके थे.

इसी के बाद वह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिलने दिल्ली गए थे. बताया जा रहा है कि  भाजपा के महासचिव  सुनील बंसल ने संजय निषाद से मुलाक़ात कार उन्हें बता दिया है कि पार्टी अपने तय किए गए फार्मूले को बदलेगी नहीं. यानी आठ सीटों पर भाजपा के और एक सीट पर राष्ट्रीय लोकदल का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा.

इनसे मिले संजय निषाद

भाजपा नेताओं के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अंबेडकरनगर की कटेहरी और मिर्जापुर की मझवां सीट भाजपा के निषाद पार्टी के लिए छोड़ी थी. इनमें से कटहरी सीट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार चुनाव हार गए थे. जबकि मझवां सीट से चुनाव जीते निषाद पार्टी के विधायक विनोद बिंद बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर भदोही से सांसद बन गए हैं. इसके चलते ही उपचुनाव हो रहे हैं. इसी आधार पर निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद यह दोनों सीटें भाजपा से देने की मांग कर रहे थे. उनके इस आग्रह को सीएम योगी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी ने ठुकरा दिया.

इस दोनों नेताओं का कहना था कि भाजपा की सहयोगी ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की पार्टी हो या निषाद पार्टी दोनों ही अपने सिंबल पर लड़कर हार चुके हैं. अब उप चुनाव में भाजपा ये गलती नहीं करेगी. इसके बाद भी संजय निषाद ने कटेहरी और मझवां सीट भाजपा ने लेने की ठान ली और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिलने दिल्ली पहुंच गए.

संजय निषाद ने छोड़ी जिद्द

दिल्ली में संजय निषाद की मुलाक़ात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से हुई लेकिन इस मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकाला. और जेपी नड्डा ने इस मामले को सुलझाने के लिए पार्टी के महासचिव सुनील बंसल को लगाया. बुधवार को संजय निषाद की मुलाकात सुनील बंसल से हुई. इस मुलाक़ात के पहले सुनील बंसल ने यूपी के दोनों उपमुख्यमंत्रियों से इस मामले में विचार-विमर्श किया.

इसी के बार सुनील बंसल ने संजय निषाद को साफ शब्दों में यह बता दिया है कि यूपी में सहयोगी दलों से साथ मिलकर उपचुनाव लड़ने का जो फार्मूला तय किया गया है, उसमें बदलाव नहीं किया जाएगा. बाकी आपके बारे में और आपकी पार्टी के बारे में कुछ और विचार किया जा रहा है जिससे आप संतुष्ट होंगे.

भाजपा हाईकमान के इस संदेश को पाते ही संजय निषाद ने अपनी जिद्द छोड़ दी है. और गोलमोल शब्दों में संजय निषाद ने यह कहा है कि वह पहले भी एनडीए में थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे. भाजपा को बड़ा भाई और अभिभावक माना है. वह जो फैसला करेंगे उसे हम मानेंगे.

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