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राहुल गांधी बोले- ‘बातचीत का ढकोसला’ बंद कर ‘काले कानूनों’ को खत्म कीजिए, सरकार के ‘मित्रों’ की आय चौगुनी हो गई

By शीलेष शर्मा | Updated: December 2, 2020 20:31 IST

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला। किसानों के प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया, 'कहा गया था कि किसान की आय दुगनी होगी। लेकिन ‘मित्रों’ की आय हुई चौगुनी और किसान की हो गई आधी।'

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ठळक मुद्देजब तक तीनों काले क़ानून ख़त्म नहीं होते, यह लड़ाई जारी रहेगी। राहुल ने पार्टी की सभी इकाइयों को किसान आंदोलन को मदद करने में लगा दिया है।

नई दिल्लीः किसानों के आंदोलन को लेकर लगातार हमलावर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को साफ़ संकेत दिए कि जब तक तीनों काले क़ानून ख़त्म नहीं होते, यह लड़ाई जारी रहेगी। 

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार राहुल ने पार्टी की सभी इकाइयों को किसान आंदोलन को मदद करने में लगा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी कहा गया है कि वे जिस रूप में आंदोलनकारी किसानों की मदद कर सकते हैं, मदद करें ताकि किसानों को आंदोलन के दौरान कोई कमी महसूस न हो। राहुल ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा "किसानों को जुमले देना बंद करें, बेईमानी, अत्याचार बंद करें, बातचीत का ढकोसला बंद करें और काले क़ानून ख़त्म करें "

राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री  मोदी ने किसानों की आय दुगनी होगी का वादा किया था लेकिन अब सच सामने आ रहा है कि उनके मित्रों की आय चौगुनी हो गयी और किसानों की आधी। इधर पार्टी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सरकार को कंपनी राज बताते हुए साफ़ संकेत दिए कि संघर्ष ही इसका इलाज है। 

किसान आंदोलन को सात दिन हो चुके हैं लेकिन सरकार अपने अड़ियल रुख पर कायम है। उनका सीधा आरोप था कि मोदी सरकार बेइमान है और किसानों से झूठ बोल रही है, इसलिए यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक मोदी सरकार काले क़ानून समाप्त नहीं कर देती।

 

उन्होंने किसानों के प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ‘‘ कहा गया था कि किसान की आय दुगनी होगी। लेकिन ‘मित्रों’ की आय हुई चौगुनी और किसान की हो गई आधी।’’ राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘यह झूठ की, लूट की, सूट-बूट की सरकार है।’’

उल्लेखनीय है कि नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 35 किसान संगठनों की चिंताओं पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने के सरकार के प्रस्ताव को मंगलवार को किसान प्रतिनिधियों ने ठुकरा दिया। सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मंगलवार को हुई उनकी लंबी बैठक बेनतीजा रही। इन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान दिल्ली के निकट पिछले एक सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। 

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