मुंबईः महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग द्वारा बृहस्पतिवार को निकाली गई लॉटरी के अनुसार मुंबई की अगली महापौर सामान्य वर्ग की महिला होंगी, एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। हालांकि, इस प्रक्रिया का शिवसेना (उबाठा) नेता और मुंबई की पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय के लिए नियमों में किसी को सूचना दिए बिना बदलाव किया गया।
उन्होंने कहा कि पिछले दो महापौर सामान्य वर्ग से थे, इसलिए नए महापौर का चयन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से होना चाहिए था। पेडनेकर ने कहा, ‘‘जिस तरह से प्रक्रिया (लॉटरी) की गई, हम उसकी निंदा करते हैं।’’
लॉटरी के माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि महापौर का पद किन श्रेणियों के लिए आरक्षित होगा, जैसे सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग। श्रेणी घोषित होने के बाद, योग्य उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करते हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका और राज्य की 28 अन्य महानगर पालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे।
कल्याण-डोंबिवली, ठाणे और उल्हासनगर में महायुति का महापौर होगा : भाजपा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख रवींद्र चव्हाण ने बुधवार को कहा कि ‘महायुति’ गठबंधन कल्याण-डोंबिवली के अलावा ठाणे और उल्हासनगर महानगरपालिकाओं में अपना महापौर बनाएगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महानगरपालिकाओं में राजनीतिक समीकरणों में हो रहे बदलावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है,
क्योंकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पांच पार्षदों ने भाजपा की सहयोगी शिवसेना को समर्थन देने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को तीनों महानगरपालिकाओं में जनता का स्पष्ट जनादेश मिला है, और तदनुसार महापौर पदों पर महायुति उम्मीदवार ही नियुक्त होंगे।
चव्हाण ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फडणवीस के लौटने के बाद मुंबई में उनके और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच एक संयुक्त बैठक होगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पिछले सप्ताह उन्होंने और शिंदे ने तीनों महानगरपालिकाओं में महापौर पदों को लेकर विस्तृत चर्चा की थी।