मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 350 टन वजनी कटरहेड को मुंबई के विक्रोली शाफ्ट में उतारा गया
By एस पी सिन्हा | Updated: May 17, 2026 21:46 IST2026-05-17T21:46:50+5:302026-05-17T21:46:56+5:30
इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसाल यह है कि 13.6 मीटर व्यास वाला यह कटरहेड इतनी बड़ी सुरंग खोदने में सक्षम है जिसमें हाई-स्पीड कॉरिडोर की अप और डाउन दोनों लाइनें एक ही सुरंग में होंगी.

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 350 टन वजनी कटरहेड को मुंबई के विक्रोली शाफ्ट में उतारा गया
नई दिल्ली:मुंबई के विक्रोली में टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के पहले कटरहेड को सफलतापूर्वक शाफ्ट में उतारा गया. 13.6 मीटर व्यास और लगभग 350 टन वजन वाला यह कटरहेड, टीबीएम के मुख्य शील्ड की प्राइमरी असेंबली के अंतिम चरण का प्रतीक है. 21 किलोमीटर लंबे मुंबई सुरंग हिस्से में से 16 किलोमीटर हिस्से के निर्माण हेतु दो टीबीएम मशीनों को असेंबल किया जा रहा है. इसमें ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, जो भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग होगी. प्रत्येक टीबीएम का वजन 3,000 टन से अधिक है और ये देश में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक उपयोग की जाने वाली सबसे बड़ी मशीनें हैं.
इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसाल यह है कि 13.6 मीटर व्यास वाला यह कटरहेड इतनी बड़ी सुरंग खोदने में सक्षम है जिसमें हाई-स्पीड कॉरिडोर की अप और डाउन दोनों लाइनें एक ही सुरंग में होंगी. इसका 350 टन वज़न लगभग 250 यात्री कारों (मिड-साइज़ एसयूवी) के बराबर है. यह यूनिट पांच अलग-अलग शिपमेंट में साइट पर पहुंचाई गई, जिन्हें 1,600 किलोग्राम उच्च-परिशुद्धता वेल्डिंग के माध्यम से जोड़ा गया. इस यूनिट में 84 कटर डिस्क, 124 स्क्रेपर तथा 16 बकेट लिप लगाए गए हैं, जो खुदाई और मलबा हटाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हैं.
कटर डिस्क मुख्य उपकरण हैं, जो चट्टानों को काटने का कार्य करते हैं. इसके बाद कटरहेड पर लगे स्क्रेपर मलबे को हटाने और साफ करने का कार्य करते हैं. जबकि बकेट लिप कटरहेड में वह खुला हिस्सा होता है, जिसके माध्यम से मलबा मशीन के मलबा कक्ष में प्रवेश करता है. यह मलबे को एकत्र करने तथा उसे पाइपलाइन प्रणाली की ओर निर्देशित करने में सहायता करता है, जिससे सुरंग से बाहर निकासी संभव हो पाती है. यह टीबीएम विक्रोली से लगभग 6 किलोमीटर की यात्रा करते हुए घने शहरी क्षेत्र और मीठी नदी के नीचे से गुजरकर बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन तक पहुंचेगी, जहां इसे बाहर निकाला जाएगा.
सुरंग निर्माण की सुरक्षित खुदाई तथा आसपास की संरचनाओं की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मॉनिटरिंग उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है. इनमें सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), ऑप्टिकल डिस्प्लेसमेंट सेंसर्स (ओडीएस) या टिल्ट मीटर्स, बीआरटी (बाय रिफ्लेक्ट टारगेट/3डी टारगेट), सुरंग की सतह पर सूक्ष्म खिंचाव मापने के लिए स्ट्रेन गेज, और पीक पार्टिकल वेलोसिटी (पीपीवी) या कंपन और भूकंपीय तरंगों की निगरानी के लिए सीस्मोग्राफ शामिल हैं.