बिहार में पिछले एक माह में 8 हजार 681 बच्चों के गायब होने की बात आई सामने, 85 प्रतिशत संख्या लड़कियां हुईं गायब
By एस पी सिन्हा | Updated: May 18, 2026 15:44 IST2026-05-18T15:44:20+5:302026-05-18T15:44:20+5:30
बिहार पुलिस मुख्यालय के स्तर से जारी इस दिशा-निर्देश में सभी थानों को तमाम जानकारियां पोर्टल पर अपडेट करने के लिए कहा गया है. इससे संबंधित एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी किया गया है.

बिहार में पिछले एक माह में 8 हजार 681 बच्चों के गायब होने की बात आई सामने, 85 प्रतिशत संख्या लड़कियां हुईं गायब
पटना: बिहार में पिछले एक माह में 8 हजार 681 बच्चों के गायब होने की जानकारी सामने आई है, जिसमें 85 प्रतिशत संख्या लड़कियों की है. ऐसे में ये आंकड़े बाल तस्करी से लेकर उन्हें अनैतिक अड्डे तक पहुंचाने की खतरनाक मंशा का भी संकेत देते हैं. यही कारण है कि राज्य में गुमशुदा या लापता बच्चों का पूरा विवरण मिशन वात्सल्य पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है. इन बच्चों की जानकारी शत-प्रतिशत इस विशेष पोर्टल पर अपलोड करने के साथ ही मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा-100 के प्रावधानों को थाना स्तर पर लागू करने के लिए खासतौर से निर्देश जारी किए गए हैं.
बिहार पुलिस मुख्यालय के स्तर से जारी इस दिशा-निर्देश में सभी थानों को तमाम जानकारियां पोर्टल पर अपडेट करने के लिए कहा गया है. इससे संबंधित एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी किया गया है. अगर कोई बच्चा मिल जाता है तो इसकी जानकारी भी इस पर दर्ज कराते हुए डेटाबेस को अपडेट रखना है. पहले गुमशुदा या लापता बच्चों की सटीक जानकारी थानावार ही उपलब्ध हो पाती थी. लेकिन इस पोर्टल के शुरू होने पर इस पर ऐसे महज 3190 बच्चों की जानकारी दर्ज थी. लेकिन सतत मॉनिटरिंग के कारण महज एक महीने में यह संख्या बढ़कर 8 हजार 681 हो गई है.
इसके सफल संचालन को लेकर थाना स्तर के सभी पुलिस कर्मियों के लिए निजी संस्थानों और विश्वविद्यालय के सहयोग से एक सशक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किया गया है. इससे संबंधित ट्रेनिंग भी 1171 पदाधिकारियों को दे दी गई है. इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सीआईडी के अंतर्गत कमजोर वर्ग की है. इस बीच यह एक बड़ा प्रश्न है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चे गायब हैं, लेकिन उनका अता-पता नहीं है. पुलिस ने 2,799 बच्चों को बरामद करने में सफलता जरूर प्राप्त की है, पर अन्य का पता नहीं चल पाया है. यह पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट है.
जानकारों की मानें तो राज्य के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां से बच्चों को काम के नाम पर बाहर ले जाया जाता है, इनमें कई का पता भी नहीं चलता. विशेष रूप से मगध प्रमंडल क्षेत्र से चूड़ी फैक्ट्री में काम कराने को बड़ी संख्या में बच्चे ले जाए जाते हैं. हालांकि, अब रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर पुलिस प्रशासन की सतर्कता के कारण इसमें कमी आई है, लेकिन अभी भी स्टेशन से ऐसे बच्चे बरामद किए जा रहे हैं. यह प्रमाणित करता है कि इस धंधे से जुड़े लोग सक्रिय हैं.
वहीं, रोहतास से ऐसे कई मामले हैं, जहां नाबालिग लड़कियों की खरीद-बिक्री तक की गई. यह सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में होता है और पुलिस में मामला जाते ही इसे रिश्तेदारी का नाम देकर सामाजिक दबाव बनाने का प्रयास भी किया जाता है, जिसके कारण मामले भी अंकित नहीं हो पाते हैं. पुलिस मुख्यालय में एडीजी (कमजोर वर्ग) ऋतुराज ने बताया है कि राज्य में मानव व्यापार के खिलाफ 1 से 30 अप्रैल तक नया सवेरा-2.0 अभियान चलाया गया. इस दौरान 46 नाबालिग बच्चों (20 बच्चियां और 26 बच्चे) समेत 94 पीड़ितों को मुक्त कराया गया.
इस अभियान के दौरान दो मानव तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है. इसी तरह बाल श्रम के मामलों में 61 कांड दर्ज किए गए, जिसमें 190 बच्चों और 3 बच्चियों को मुक्त कराया गया. जबकि लैंगिक अपराध और ऑर्केस्ट्रा या डांस ग्रुप के मामले में 20 कांड दर्ज किए गए, जिसमें 92 नाबालिग बच्चियों और 1 नाबालिग बच्चे समेत 140 पीड़ितों को मुक्त कराया गया. 35 महिलाओं समेत 114 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया.
इस तरह नया सवेरा अभियान के दूसरे चरण में 427 पीड़ितों को राज्यभर से मुक्त कराया गया है और 116 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. मुक्त कराए गए पीड़ितों में पश्चिम बंगाल के 28, हरियाणा के 2, झारखंड के 2, उत्तर प्रदेश के 6, छत्तीसगढ़ के 1, उड़ीसा के 3 और नेपाल के 1 शामिल हैं. ऋतुराज ने बताया कि पुलिस इसकी समीक्षा कर रही है कि किस क्षेत्र में और किन परिस्थितियों में ये बच्चे गायब हुए हैं ताकि उस अनुरूप कार्रवाई की जा सके.
बच्चों की सुरक्षा को लेकर चाइल्ड इंडिया फाउंडेशन और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चाइल्डलाइन सेवा का संचालन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि बच्चों के मामले में थाना स्तर पर त्वरित गंभीरता नहीं बरते जाने के कारण ही असामाजिक और आपराधिक तत्व अपनी मंशा में सफल हो जाते हैं. इसका एक उदाहरण भी है. करीब पांच साल पहले गया के डेल्हा थाना क्षेत्र में तीन बच्चे एक साथ शाम में गायब हो गए. ऋतुराज ने बताया कि अभियान के दौरान सर्वाधिक गिरफ्तारी करने वाले टॉप दो जिलों रोहतास और अररिया को पुरस्कृत किया जाएगा.