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वैश्विक समुदाय के लिये सभी को टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए: सीतारमण

By भाषा | Updated: April 8, 2021 22:45 IST

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नयी दिल्ली, आठ अप्रैल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि वैश्विक समुदाय के लिये कोविड-19 टीके की सभी के लिये उपलब्धता सुनिश्चित करना और महामारी को खत्म करना मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। कोरोना संक्रमण के नये मामले बढ़ने के बीच उन्होंने यह बात कही।

सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के संचालन मंडल की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय समिति (आईएमएफसी) की डिजिटल तरीके से आयोजित बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह बैठक मुद्राकोष-विश्वबैंक की बैठक के दौरान हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये निम्न कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था में तेजी से परिवर्तन के बारे में वैश्विक नीति एजेंडा (जीपीए) का सुझाव है। इसके सभी लाभों को उभरती और कम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में देखे जाने की जरूरत है।

वित्त मंत्रालय ने सीतारमण के हवाले से एक बयान में कहा, ‘‘निम्न कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था में आर्थिक रूपांतरण का बोझ इन देशों पर गैर-आनुपातिक रूप से ऊंचा होगा और अल्पकाल में इसके सकारात्मक लाभ की संभावना कम है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा जोर समानता के सिद्धांत और जलवायु से संबंधित कार्रवाई को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारी पर बने रहना चाहिए।’’

सीतारमण ने आईएमएफ के इस विचार से सहमति जतायी कि अभी प्राथमिकता महामारी से पार पाना और टीके तथा चिकित्सा समाधान की सार्वभौमिक रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है।’’

उन्होंने आईएमएफ के 190 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले गवर्नरों/वैकल्पिक गर्वनरों की बैठक में कहा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। छह अप्रैल, 2021 तक 8.31 करोड़ टीके की खुराक दी जा चुकी है।

इतना ही नहीं, भारत ने 80 देशों को 6.5 करोड़ टीके की खुराक उपलब्ध करायी है। इसमें एक करोड़ टीके की खुराक अनुदान स्वरूप उपलब्ध करायी गयी है। इन टीकों का उत्पादन भारत में ही हुआ है।

आईएमएफसी के सदस्यों ने समिति को कोविड-19 महामारी और आर्थिक पुनरूद्धार के लिये सदस्य देशों की तरफ से उठाये गये कदमों के बारे में जानकारी दी।

आईएमएफसी की बैठक साल में दो बार होती है। एक बैठक आईएमएफ-विश्वबैंक की जाड़े और गर्मियों के बीच अप्रैल में होने वाली बैठक के दौरान होती जबकि दूसरी अक्टूबर में सालाना बैठक के दौरान होती है।

समिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले साझा मसलों पर चर्चा की।

कोविड-19 महामारी के कारण मुद्राकोष-विश्वबैंक की यह बैठक पिछले साल की तरह वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये हुई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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