युद्ध के दौर में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाने की चुनौती

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 16, 2026 07:24 IST2026-04-16T07:24:12+5:302026-04-16T07:24:47+5:30

साथ ही दलहन और तिलहन का कम उत्पादन खाद्य मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है.

challenge of controlling rising inflation during war period | युद्ध के दौर में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाने की चुनौती

युद्ध के दौर में बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाने की चुनौती

जयंतीलाल भंडारी

इस समय पश्चिमी एशिया में लगातार चल रहे संघर्ष तथा अमेरिका के द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, माल ढुलाई के महंगा होने और तेल आपूर्ति बाधाओं के कारण दुनिया के साथ-साथ भारत में भी महंगाई बढ़ रही है. हाल ही में 13 अप्रैल को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी. ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 3.63 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर 3.11 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई.

भारत में खाड़ी देशों से आयातित कच्चे माल के महंगे होने और ईंधन, बिजली व गैस की कीमतों में वृद्धि से रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरण महंगे हुए हैं. खासतौर से आयातित केमिकल्स से जुड़े कच्चा माल के महंगे होने से पेंट सहित विभिन्न उत्पादों की कीमतें बढ़ी हैं. साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे एफएमसीजी प्रोडक्ट्‌स बनाने वाली कई कंपनियां पैकेट छोटे करने की रणनीति पर भी आगे बढ़ी हैं.

इतना ही नहीं, देश में महंगाई बढ़ने की एक नई चिंता यह भी है कि हाल ही में 13 अप्रैल को भारतीय मौसम विभाग ने अल नीनो के कारण 2026 में सामान्य से कम मानसून का अनुमान लगाया है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है. मौसम विभाग ने वर्ष 2023 के बाद पहली बार बारिश के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 92 प्रतिशत रहने की संभावना बताई है. यह पूर्वानुमान पांच फीसदी अधिक या कम की मॉडल त्रुटि के साथ जारी किया गया है.

यद्यपि पिछले आंकड़े बताते हैं कि सामान्य से कम मानसून वाले वर्षों में जब बारिश का समय, वितरण और फैलाव समान रहा तब खरीफ का उत्पादन कम नहीं हुआ, किंतु गैर-सिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली दलहन और तिलहन जैसी फसलों के लिए जोखिम हो सकता है. साथ ही दलहन और तिलहन का कम उत्पादन खाद्य मुद्रास्फीति पर असर डाल सकता है. ऐसे में महंगाई नियंत्रण के लिए राहत और सुधारों को तेजी से लागू करने की बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा.

हाल ही में वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों व वैश्विक संगठनों की रिपोर्टों में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के लंबा खिंचने पर भारत की विकास दर में कमी और महंगाई के बढ़ने के अनुमान प्रस्तुत किए गए हैं. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और ऊर्जा कीमतों व आपूर्ति बाधाओं के कारण भारत में विकास दर धीमी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है.

मूडीज रेटिंग्स ने भारत की विकास दर के अनुमान को घटाते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6 प्रतिशत कर दिया, जो पहले 6.8 प्रतिशत आंका गया था. मूडीज ने चालू वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से अधिक है. ऐसे में महंगाई दर के रिजर्व बैंक के द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत के लक्ष्य दायरे से ऊपर जाना चुनौतीपूर्ण होगा.

उम्मीद करें कि सरकार अमेरिका-ईरान टकराव के बीच महंगाई नियंत्रण के लिए और अधिक रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ेगी. कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति का रुख और बढ़ाया जाएगा. सरकार के द्वारा खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उवर्रकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ा जाएगा.

Web Title: challenge of controlling rising inflation during war period

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