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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: समझदारी दिखाएं इमरान खान

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: September 9, 2019 07:05 IST

पाकिस्तान के सेनाप्रमुख जनरल बाजवा ने इमरान के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर के लिए अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ता रहेगा. इसका जवाब भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने बहुत ही सधे हुए तरीके से दिया है.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्नी इमरान खान की मुसीबतों को मैं अच्छी तरह से समझता हूं. उन्हें पाकिस्तान की जनता को बताना पड़ रहा है कि कश्मीर के सवाल पर वे जमीन-आसमान एक कर देंगे. वे जुल्फिकार अली भुट्टो को भी पीछे छोड़ देंगे. भुट्टो ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान भारत के साथ एक हजार साल तक भी लड़ता रहेगा.

पाकिस्तान के सेनाप्रमुख जनरल बाजवा ने इमरान के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा है कि पाकिस्तान कश्मीर के लिए अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ता रहेगा. इसका जवाब भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने बहुत ही सधे हुए तरीके से दिया है. उन्होंने ठीक ही कहा है कि कश्मीर की शांति पाकिस्तान के रवैये पर निर्भर है.

अगर पाकिस्तान कश्मीरियों को हिंसा के लिए भड़काता रहा और आतंकियों को भेजता रहा तो जो प्रतिबंध उन पर अभी लगे हुए हैं, उन्हें हटाना मुश्किल होगा. इमरान खान को अब अच्छी तरह से पता चल गया है कि दुनिया का कोई भी देश भारत में कश्मीर के पूर्ण विलय पर आपत्ति नहीं कर रहा है.

बस चीन, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश भी अब यह कहने लगे हैं कि कश्मीर में मानव अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए. बिल्कुल होनी चाहिए यह तो हम भी कह रहे हैं लेकिन इसका धारा 370 और 35 ए के खात्मे से क्या संबंध है? कश्मीर के पूर्ण विलय से क्या संबंध है?

इमरान खान जानते हैं कि कश्मीर में जो हो चुका है, उसे बदला नहीं जा सकता है. हां, इतना जरूर हो सकता है जैसे कि गृह मंत्नी अमित शाह ने संसद में इशारा किया था कि जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा मिल जाए. अब इमरान खान को इतिहास का पहिया उल्टा घुमाने की कोशिश करने की बजाय यह सोचना चाहिए कि कश्मीरियों का भविष्य पाकिस्तान की दखलंदाजी से मुक्त कैसे हो?

पाकिस्तानी आतंक के कारण कश्मीरी अब तक काफी नुकसान उठा चुके हैं. कश्मीर के नाम पर पाक की फौज पाकिस्तानियों के सीने पर चढ़ी बैठी है, उसे इमरान नहीं समझाएंगे तो कौन समझाएगा? कश्मीर की वजह से पूरा पाकिस्तान कराह रहा है. उसी की वजह से पहले पाकिस्तान को अमेरिका की गुलामी करनी पड़ी और अब उसे चीन की ‘गुलामी’ सहन करनी पड़ रही है. इमरान चाहें और थोड़ी हिम्मत करें तो वे पाक को इस जन्मजात गुलामी से मुक्ति दिला सकते हैं.  

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