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अपने ही पैर पर क्यों कुल्हाड़ी मारती है कांग्रेस?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 27, 2026 05:43 IST

पार्टी प्रमुख, अस्सी वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन उपद्रवियों को अनुमति दी थी या राहुल गांधी, जो पार्टी के वास्तविक सर्वोच्च नेता हैं, ने इस अजीबोगरीब योजना को मौन समर्थन दिया था.

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ठळक मुद्दे वैश्विक एआई इम्पैक्ट समिट में हुए बेकार प्रदर्शन को देखकर स्तब्ध हैशक्तिशाली प्रधानमंत्री के खिलाफ लड़ रही पार्टी द्वारा किया गया आत्मघाती गोल था.फटकार लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बजाय उनका बचाव कर रहा है.

अभिलाष खांडेकर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा अपनाई जा रही ‘शर्टलेस राजनीति’ के नए ब्रांड को लेकर चल रहे हालिया विवाद ने यह साबित कर दिया है कि पुरानी पार्टी के पास दिमाग भी नहीं है. अगर पिछले हफ्ते भारत मंडपम में युवाओं के एक छोटे समूह ने अपनी कमीजें उतार दी थीं, तो कांग्रेस पार्टी ने अपना दिमाग ही सिर के बाहर निकाल कर रख दिया है. दूसरे शब्दों में कहें तो, पूरी कांग्रेस पार्टी एक बेहद चतुर भाजपा और एक ऐसे राष्ट्र के सामने बिना सोचे-समझे काम कर रही है जो वैश्विक एआई इम्पैक्ट समिट में हुए बेकार प्रदर्शन को देखकर स्तब्ध है.

यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी प्रमुख, अस्सी वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन उपद्रवियों को अनुमति दी थी या राहुल गांधी, जो पार्टी के वास्तविक सर्वोच्च नेता हैं, ने इस अजीबोगरीब योजना को मौन समर्थन दिया था. दोनों ही मामलों में, यह एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री के खिलाफ लड़ रही पार्टी द्वारा किया गया आत्मघाती गोल था.

एक तीसरी संभावना भी है कि शर्ट उतारने वाले यूथ कांग्रेस के लड़कों ने वरिष्ठ नेतृत्व को विश्वास में नहीं लिया होगा और गुप्त रूप से एआई सम्मेलन में घुसपैठ की होगी, हालांकि उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण कराकर सावधानी बरती थी. लेकिन हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें फटकार लगाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बजाय उनका बचाव कर रहा है.

मार्गरेट अल्वा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता, जिन्होंने राहुल के पिता राजीव गांधी के साथ काम किया था, नाराज हैं. देशभर में लोगों का मानना है कि भले ही विज्ञान की तेजी से उभरती शाखा की कमजोरियों और अवसरों को समझने के उद्देश्य से आयोजित उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन का पहला दिन खराब ढंग से आयोजित किया गया था और प्रतिनिधियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी,

फिर भी कांग्रेसियों को वहां जाने का कोई अधिकार नहीं था. यदि उन्हें टैरिफ मामले में अमेरिका के समक्ष कथित भारतीय आत्मसमर्पण के खिलाफ ‘लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक अनोखे तरीके से’ विरोध करना था, तो यह न तो वह अवसर था, न ही वह स्थान और न ही वह तरीका था जिस तरह से इसे आयोजित किया गया था.

इससे विदेशी प्रतिनिधियों, जिनमें कई राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल हैं, के सामने कांग्रेस पार्टी की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है. विपक्षी पार्टी की समस्याएं उन समस्याओं से कहीं अधिक गंभीर और बड़ी प्रतीत होती हैं जिनका सामना एआई विशेषज्ञों को वाई-फाई नेटवर्क कनेक्टिविटी के बिना, भारत मंडपम में पंजीकरण में कठिनाई, यूपीआई भुगतान प्लेटफॉर्म के अनुपलब्ध होने के कारण भारतीय रुपए में भुगतान करने में हुई परेशानी और उससे उत्पन्न अराजकता के रूप में करना पड़ा, जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया था.

स्वाभाविक रूप से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाहर से गुस्से में दिख रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर भाजपा के सभी नेता खुश हैं कि कांग्रेस ने यह आत्मघाती कदम उठाया है. मोदी ने स्वाभाविक रूप से कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. इस तीखी आलोचना में कई लोग उनका समर्थन कर रहे हैं. ‘शर्टलेस गैंग’ ने प्रधानमंत्री के प्रति सहानुभूति पैदा कर दी है,

जिन्होंने वैश्विक एआई नेताओं से आगे निकलने के लिए इस बड़े वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया. सच्चे भारतीयों को इस बात पर खुशी होनी चाहिए थी कि भारत एक ऐसे नए क्षेत्र में कदम रख रहा है जिस पर अमेरिकियों और चीन का दबदबा है. भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक चुनौती है.

हालांकि कई भारतीय कंपनियां विदेशी प्रौद्योगिकी के दिग्गजों के साथ संयुक्त उद्यम में परियोजनाएं और उत्पाद विकसित कर रही हैं, लेकिन यह प्रतिष्ठित सम्मेलन किसी भी तरह से राजनीतिक ‘अखाड़ा’ नहीं था. इंडिया गठबंधन के सहयोगी अखिलेश यादव या बसपा सुप्रीमो मायावती और अन्य लोग ठीक ही कांग्रेस, खासकर राहुल गांधी की जमकर आलोचना कर रहे हैं.

हो सकता है बिहार और महाराष्ट्र में लगातार चुनावी हार के चलते कांग्रेस पार्टी के नेता निराश हों, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे कुछ भी करें और भारत की छवि से खिलवाड़ करें. एआई शिखर सम्मेलन स्थल पर किए गए भद्दे विरोध प्रदर्शनों से शायद उन्होंने कुछ ऐसे तटस्थ समर्थकों को खो दिया है जो भाजपा को नापसंद करते हैं.

यह भाजपा का सम्मेलन नहीं था, न ही कोई राजनीतिक रैली थी, यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों को यह बात समझ लेनी चाहिए थी. मैं मूल मुद्दे पर आता हूं. उन मुट्ठी भर और उपद्रवी प्रदर्शनकारियों को किसने अधिकृत किया था? कांग्रेस, जिसने पहले ही अपना नुकसान कर लिया है, उसे अब इसकी जांच करनी चाहिए.

यदि राहुल गांधी अमेरिका से समझौते, ट्रम्प, एपस्टीन से संबंधित अन्य मुद्दे उठाना चाहते हैं तो विपक्ष के नेता के रूप में वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, क्योंकि यह समझौता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.लेकिन उन्हें यह भी समझना होगा कि पार्टी के सहयोगियों की ऐसी मूर्खतापूर्ण कार्रवाइयों से सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करने और मजबूत भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता पर संदेह और बढ़ जाता है. पहले ही मणिशंकर अय्यर, हालांकि एक कम प्रसिद्ध नेता, राहुल गांधी पर शाब्दिक हमला बोल चुके हैं.

कई वरिष्ठ नेता - गुलाब नबी आजाद, कपिल सिब्बल, अशोक चव्हाण - उनकी पार्टी छोड़ चुके हैं. मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के प्रतिभाशाली नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिंद देवड़ा जैसे युवा नेता भी कांग्रेस के साथ नहीं हैं. यही कांग्रेस की स्थिति है. रणनीतिक रूप से, कांग्रेस भारतीयों को यह याद दिलाने में विफल रही कि भाजपा नेताओं ने 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के खिलाफ इससे भी कहीं अधिक चौंकाने वाला और घटिया प्रदर्शन किया था! क्या वह 2026 में भाजपा को वैसे ही जवाब दे रही है?  

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