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ब्लॉग: भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार का लोहा मानने लगी दुनिया

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: September 26, 2024 11:41 IST

इतनी तेजी से चीन, अमेरिका और जापान की जीडीपी भी नहीं बढ़ेगी. रे डेलियोज ग्रेट पाॅवर इंडेक्स को दुनिया के 24 सबसे महत्वपूर्ण देशों की अगले एक दशक की प्रगति को चित्रित करनेवाला सबसे विश्वसनीय पैमाना माना जाता है.

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ठळक मुद्देभारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार का लोहा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां भी मानने लगी हैं. एक एजेंसी ने आकलन किया है कि भारत की जीडीपी की विकास दर का मुकाबला अगले दस वर्षों तक दुनिया का कोई देश नहीं कर सकेगा.रे डेलियोज ग्रेट पाॅवर इंडेक्स के मुताबिक अगले दस साल तक भारत की डीजीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. 

भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार का लोहा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां भी मानने लगी हैं. एक एजेंसी ने आकलन किया है कि भारत की जीडीपी की विकास दर का मुकाबला अगले दस वर्षों तक दुनिया का कोई देश नहीं कर सकेगा. रे डेलियोज ग्रेट पाॅवर इंडेक्स के मुताबिक अगले दस साल तक भारत की डीजीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. 

इतनी तेजी से चीन, अमेरिका और जापान की जीडीपी भी नहीं बढ़ेगी. रे डेलियोज ग्रेट पाॅवर इंडेक्स को दुनिया के 24 सबसे महत्वपूर्ण देशों की अगले एक दशक की प्रगति को चित्रित करनेवाला सबसे विश्वसनीय पैमाना माना जाता है. इंडेक्स में यह भी दर्शाया गया है कि जर्मनी जैसी कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सुस्त पड़ने के कारण भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बनते देर नहीं लगेगी. 

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने भी भारत की जीडीपी विकास दर इस वर्ष 6.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है. एशियाई विकास बैंक ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार को स्वीकार किया है. विकास बैंक के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की आर्थिक वृद्धि 7 प्रतिशत की रफ्तार से होगी. भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार हमारी अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. 

पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की दर तमाम अवरोधों के बावजूद उच्च रही है. पी.वी. नरसिंहराव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने उदारीकरण का दौर शुरू कर सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी. 2004 से 2014 के दौरान अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री रहे और अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की औसत दर से आगे बढ़ती चली गई. 2014 में सत्ता परिवर्तन हुआ. 

मोदी सरकार ने आर्थिक सुधारों को और व्यापक तथा लचीला बनाया. सरकार ने पूंजी निवेश के अनुकूल माहौल तैयार किया, कानूनों एवं नियमों को ज्यादा उदार बनाया. भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां इस वक्त बुनियादी ढांचे तथा कृषि पर सबसे ज्यादा सरकारी निवेश हो रहा है. बुनियादी ढांचे के विकास से अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है. 

कृषि क्षेत्र ने पिछले एक दशक में कोरोना काल के अपवाद को छोड़ दिया जाए तो चार प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर हासिल की है जो पचास से नब्बे के दशक तक डेढ़ से दो प्रतिशत और 21 वीं सदी के पहले दशक में तीन प्रतिशत थी. बुनियादी ढांचे का दस साल पहले बुरा हाल था. आज भारत में बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदली हुई नजर आती है. हर छोटे-बड़े शहर तथा गांव तक मजबूत सड़कों की पहुंच हो गई है. 

देश के अधिकांश गांव राज्य या राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ गए हैं. गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने लगा है. इससे देश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर भी बदलने लगी है. नरसिंहराव के दौर से लेकर अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के मामले में दुनिया की ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं से बराबरी कर रही है. हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद कोविड-19 या कोरोना महामारी के दौरान नजर आई. 

अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस तथा जर्मनी जैसी बेहद मजबूत अर्थव्यवस्थाओं ने कोरोना काल में पानी मांगना शुरू कर दिया था लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से डटी रही. 140 करोड़ की आबादी के साथ वैश्विक महामारी का सामना करते हुए अर्थव्यवस्था को संभालना बेहद कठिन चुनौती थी लेकिन बुनियाद मजबूत होने के कारण स्थिति नियंत्रण में रही. 

कोरोना के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था जिस तेजी के साथ पटरी पर आई, वह अपने आप में एक मिसाल है. वर्ष 2020, 2021 तथा 2022 की पहली तिमाही तक अर्थव्यवस्था पर कोरोना के दुष्परिणाम मंडराते रहे मगर हमारी सरकारी आर्थिक नीतियां इतनी दूरदर्शी रहीं कि वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही से ही स्थितियां संभलने लगीं अैर उस वर्ष के अंत तक अर्थव्यवस्था पटरी पर आ गई. 

2023 में हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ी. हमने चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस तथा जर्मनी को विकास के मामले में पीछे छोड़ दिया. रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक हमारा देश यह दशक खत्म होने के पूर्व ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा लेकिन आत्मसंतुष्ट  होकर बैठे नहीं रहा जा सकता. प्रति व्यक्ति आमदनी के मामले में हम अब भी बहुत पीछे हैं. 

उसमें वृद्धि जरूर हो रही है लेकिन 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना तभी साकार होगा जब भारत में प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की बराबरी करने लगे. हमने बाधाओं के बावजूद शिखर स्पर्श किए हैं और इसमें संदेह नहीं कि आर्थिक विकास के मामले में भारत जल्द ही विश्व के लिए आदर्श बन जाएगा

 

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