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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: घरेलू बचत बढ़ाने के उपायों पर देना होगा जोर

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: September 11, 2024 09:31 IST

घटती हुई घरेलू बचत के खतरे को भांपते हुए हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की बैठक में कहा कि बैंकों के द्वारा जमा राशि बढ़ाने के लिए ऐसी आकर्षक ब्याज योजना लाई जानी चाहिए, जिससे बैंकों में सेविंग्स की धनराशि में तेज इजाफा हो सके.

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ठळक मुद्देइस समय देश में विभिन्न बैंकों के द्वारा जमा योजनाओं को आकर्षक बनाए जाने का नया परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है. राष्ट्रीय लघु बचत प्राप्तियों के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में 14.77 लाख करोड़ रु का प्रावधान किया गया था.सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए लघु बचत योजनाओं के तहत संग्रह राशि का भी उपयोग करती है.

हाल ही में प्रकाशित घरेलू बचत संबंधी आंकड़ों के मुताबिक घरेलू बचत वर्ष 2006-07 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 18 फीसदी के स्तर पर थी, वह वर्ष प्रतिवर्ष घटते हुए 2023-24 में जीडीपी के 5.2 फीसदी से भी कम स्तर पर पहुंच गई है और यह पिछले पांच दशकों में सबसे कम स्तर पर है, जबकि चीन में पिछले एक दशक से घरेलू बचत दर औसतन 35 फीसदी के आसपास है. 

इसमें कोई दो मत नहीं है कि देश में आम आदमी का पहला आर्थिक सहारा कही जाने वाली घरेलू बचत में लगातार कमी आने का चिंताजनक रुझान दिखाई दे रहा है. 

घटती हुई घरेलू बचत के खतरे को भांपते हुए हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल की बैठक में कहा कि बैंकों के द्वारा जमा राशि बढ़ाने के लिए ऐसी आकर्षक ब्याज योजना लाई जानी चाहिए, जिससे बैंकों में सेविंग्स की धनराशि में तेज इजाफा हो सके. इसी परिप्रेक्ष्य में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने जमा बढ़ाने के लिए अमृत वृद्धि योजना शुरू की है, जो जमा के प्रोत्साहन के मद्देनजर आकर्षक दिखाई दे रही है. 

ऐसे में इस समय देश में विभिन्न बैंकों के द्वारा जमा योजनाओं को आकर्षक बनाए जाने का नया परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है. राष्ट्रीय लघु बचत प्राप्तियों के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में 14.77 लाख करोड़ रु का प्रावधान किया गया था. लेकिन 23 जुलाई को पेश किए गए वर्ष 2024-25 के पूर्ण बजट में लघु बचतों से प्राप्ति के अनुमान को घटाकर 14.20 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है. 

सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए लघु बचत योजनाओं के तहत संग्रह राशि का भी उपयोग करती है. ऐसा नहीं है कि घरेलू बचत में कमी का कारण देश में लोगों की आय में कमी आना है. वस्तुतः भारत में प्रतिव्यक्ति आय तेजी से बढ़ रही है. 10 वर्ष पहले वर्ष 2014-15 में जो प्रति व्यक्ति आय 86,647 रुपए थी, वह 2023-24 में करीब 2.28 लाख रुपए के स्तर पर पहुंच गई है. 

इस तरह तेजी से बढ़ी आय के साथ अब बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत का ऐसी जगह पर निवेश कर रहे हैं, जहां उनको ज्यादा ब्याज और ज्यादा रिटर्न मिल रहा है. लोगों की बचत का तेज प्रवाह शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट, महंगे वाहनों, सोने एवं बहुमूल्य धातुओं की खरीदी की ओर बढ़ रहा है. 

यद्यपि घरेलू बचत के घटने की स्थिति चिंताजनक है, लेकिन घरेलू बचत का घटना किसी वित्तीय संकट की आहट नहीं है. उम्मीद करें कि हाल ही में वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को घरेलू बचतों के निवेश को आकर्षक व जोखिम रहित बनाने के लिए जो दिशानिर्देश दिए गए हैं, उनके मद्देनजर सभी बैंक अपनी बचत योजनाओं को आकर्षक बनाएंगे.  

टॅग्स :सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)सेविंग
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