पटनाः बिहार में बंदरों के आतंक से रेल महकमा आतंकित हो गया है। दरअसल, ट्रैक पर रफ्तार भर रही ट्रेन के ग्रीन सिग्नल को बंदर 'लाल' कर गाडियों को रूकने पर मजबूर कर दे रहे हैं। होता यह है कि जैसे ही गेटमैन गाड़ियों के लिए ग्रीन सिग्नल देता है, तभी बंदर पेड़ से इलेक्ट्रॉनिक गेट पर कूद जाते हैं, जिसकी वजह से सिग्नल रेड(लाल) हो जाता है। हालत ये है कि सिग्नल को ग्रीन करने के साथ ही गेटमैन डंडा लेकर दौड़ता है, बंदरों को भगाता है, फिर से गेट को लॉक करता है, जब जाकर ट्रेनें वहां से पार कर पाती हैं। ऐसे में बंदरों के इस काम के बाद अब रेलवे कर्मियों की नौकरी पर बन आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बंदरों ने सीवान जिले के रेलवे स्टेशनों पर भी आतंक फैला रखा है। चाड़वां रेल गेट पर बंदरों की हरकतों के चलते गेटमैन की नौकरी ही खतरे में पढ़ गई है। रफ्तार भर रही ट्रेनों के लिए ग्रीन सिग्नल होने पर बन्दर पेड़ से इलेक्ट्रॉनिक गेट पर कूद कर सिग्नल लाल कर दे रहे हैं।
ट्रेन परिचालन बाधित होने के डर से लगातार गेटमैन डंडे लेकर दौड़ता है और फिर से गेट लॉक करता है तब ट्रेनें निर्बाध रफ्तार भरती हैं। गेट मैन धर्मेन्द्र के अनुसार बंदरों ने ड्यूटी करना मुहाल कर दिया है। ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ रहा है। यही नहीं आवागमन करने के दौरान बंदर अकेला देख हमला भी कर दे रहे हैं।
बंदरों के हमले से लोग न सिर्फ जख्मी हो जा रहे हैं बल्कि भयभीत भी हो जा रहे हैं। स्थिति ऐसी हो गई है कि रेलवे स्टेशन पर भी लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बताया जाता है कि सीवान के मैरवा रेलवे स्टेशन पर उस समय स्थिति असामान्य हो गई, जब एक अकेले बंदर ने यात्रियों के बीच आकर उत्पात मचाना शुरू कर दिया।
देखते ही देखते यात्री तितर-बितर होकर इधर-उधर भागने लगे। वहीं बंदर ने कई यात्रियों का सामान बिखेर दिया तो कई लोगों को भगा भी दिया। गनीमत यह रही कि कोई यात्री जख्मी नहीं हुई। स्थिति ऐसी हो गई कि डर से कोई बंदर को भगाने तक नहीं जा रहा था।
जिसने भी प्रयास किया उसी पर बंदर ने हमला कर दिया। बंदर के उत्पाद के चलते मैरवा रेलवे स्टेशन पर दो घंटे तक स्थिति असमान्य बनी रही। स्थानीय लोगों के अनुसार रेल विभाग द्वारा वन विभाग को सूचना देकर इन बंदरों को पकड़वाने की मांग की गई है।