पटनाः बिहार में नई सरकार गठन के बाद भी अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है। लेकिन अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गहमागहमी तेज होती जा रही है। सूत्रों की मानें तो मई के पहले हफ्ते में कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है। जानकारों के अनुसार पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। ऐसे में भाजपा और जदयू दोनों खेमों में कुर्सी की जंग अपने शबाब पर है। जहां एक ओर पुराने चेहरे फिर से मंत्री पद पाने की उम्मीद में हैं, वहीं दूसरी ओर युवा विधायक दिल्ली तक लॉबिंग कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
जानकारों की मानें तो जदयू में बड़े बदलाव की उम्मीद कम जरूर है, लेकिन पिछले कैबिनेट में खाली रह गए 6-7 पदों पर इस बार नए-पुराने चेहरों का संगम देखने को मिल सकता है। पिछली नीतीश सरकार में भाजपा के 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।
ऐसे में इस बार भी पार्टी अपने कोर लीडरशिप को बनाए रखते हुए कुछ नए चेहरों को मौका देने के मूड में दिख रही है। जदयू सूत्रों के अनुसार अधिकतर पुराने मंत्री रिपीट हो सकते हैं, लेकिन विभागों में फेरबदल तय माना जा रहा है। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर जदयू पूरा कोटा भरता है, तो महेश्वर हजारी, शीला मंडल, संतोष निराला जैसे नामों की किस्मत चमक सकती है।
वहीं नए चेहरों में चेतन आनंद, रूहेल रंजन और मृत्युंजय कुमार जैसे नाम उभरते सितारे बनकर सामने आ रहे हैं। छोटे सहयोगी दलों में भी हलचल कम नहीं है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष सुमन का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि अन्य दलों में फिलहाल बड़ा बदलाव मुश्किल दिख रहा है।
दिलचस्प मोड़ यह है कि महागठबंधन में संभावित टूट को ध्यान में रखते हुए कुछ सीटें खाली रखी जा सकती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर सियासी बारगेनिंग की जा सके। जदयू कोटे से संभावित मंत्रियों में श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, जमा खां और सुनील कुमार पुराने को संगठन और अनुभव के आधार पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।
जबकि के खाते से जिन नामों पर चर्चा है, उनमें विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, लखेंद्र पासवान, रमा निषाद, प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अरुण शंकर प्रसाद और संजय सिंह ‘टाइगर’ के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका मिल सकता है।
वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों में से संतोष कुमार सुमन (हम), संजय पासवान (लोजपा-रा), संजय कुमार सिंह (लोजपा-रा), दीपक प्रकाश (रालोमो) को संतुलन साधने के लिए प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इस तरह बिहार की राजनीति एक बार फिर शतरंज की बिसात बन चुकी है जहां हर चाल सोच-समझकर चली जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी किसे सत्ता की कुर्सी पर बिठाते हैं और किसे बाहर का रास्ता दिखाते हैं।