नई दिल्लीः फरार डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी और कथित तौर पर प्रतिबंधित दवाओं के प्रमुख सप्लायर सलीम डोला को इस्तांबुल से भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया है। डोला को तुर्की की राष्ट्रीय खुफिया संगठन (एनसीआई) और स्थानीय पुलिस के संयुक्त अभियान में इस्तांबुल में ही हिरासत में लिया गया था। दिल्ली में डोला को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनबीआई) के आरके पुरम कार्यालय में रखा गया है और बाद में उसे मुंबई पुलिस को सौंप दिया जाएगा। डोंगरी निवासी डोला एक दशक पहले भारत से भागने के बाद विदेश से ही कई राज्यों में फैले नशीले पदार्थों के नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से चलाए गए समन्वित अभियान के बाद यह प्रत्यर्पण किया गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने मंगलवार को कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस लाने में सफलता हासिल की।
गृह मंत्री शाह ने इसे मादक पदार्थ के गिरोहों के खिलाफ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति बताते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मोदी सरकार के मादक पदार्थ के गिरोहों को बेरहमी से कुचलने के मिशन के तहत, मादक पदार्थ के खिलाफ हमारी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से सीमापार भी अपनी पकड़ मजबूत की है।’’ अब ड्रग सरगना चाहे कहीं भी छिपे, सुरक्षित नहीं है।"
उसकी भूमिका तब सामने आई, जब फैसल जावेद शेख और अल्फिया फैसल शेख द्वारा कथित तौर पर संभाले गए नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त धनराशि की जांच की जा रही थी। माना जाता है कि इन दोनों ने डोला से मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स खरीदी थी। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में एमडी की आपूर्ति श्रृंखला सांगली और सूरत से लेकर यूएई और तुर्की तक फैली, जहां डोला कथित तौर पर अपने सहयोगियों के माध्यम से संचालन का नेतृत्व कर रहा था।
पिछले साल अधिकारियों ने इंटरपोल की मदद से डोला के बेटे ताहिर और भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को यूएई से निर्वासित कर दिया, जिससे उसका नेटवर्क कमजोर हो गया। मुंबई के बायकुला इलाके में मध्यमवर्गीय परिवार में 1966 में जन्मा डोला ने कम उम्र में ही अंडरवर्ल्ड में कदम रख दिया। उसकी दोस्ती डॉन छोटा शकील से हुई, जो उस समय दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का सदस्य था।