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धर्म पूछा और कलमा पढ़ने को कहा..., मुंबई में यूएस रिटर्न शख्स ने 2 गार्डों पर किया जानलेवा हमला

By अंजली चौहान | Updated: April 28, 2026 11:54 IST

Mira Road Stabbing: आरोपी के घर से कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े नोट और कट्टरपंथी सामग्री बरामद होने के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने मीरा रोड चाकूबाजी मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। जांचकर्ता एक अकेले हमलावर द्वारा किए गए हमले और ऑनलाइन कट्टरपंथ के संदेह की जांच कर रहे हैं।

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Mira Road Stabbing:मुंबई के मीरा रोड इलाके में धर्म के आधार पर हमला करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस घटना की जांच महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड ने अपने हाथों में ले ली है। क्योंकि हमला करने वाले शख्स का संबंध इस्लामिक स्टेट से होने का शक है। जांच में आरोपी के घर से ISIS से जुड़ा कथित चरमपंथी सामान बरामद हुआ। अधिकारियों ने आगे बताया कि अब इस मामले की जांच संभावित "लोन वुल्फ" (अकेले आतंकी) एंगल से की जा रही है।

आरोपी गिरफ्तार

आरोपी की पहचान जैब जुबैर अंसारी (31) के रूप में हुई है। नया नगर पुलिस ने हमले के कुछ ही घंटों के भीतर इलाके के CCTV फुटेज के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसे ठाणे जिला अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे 4 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस के अनुसार, यह घटना मीरा रोड ईस्ट में वोकहार्ट अस्पताल के पीछे, अस्मिता ग्रैंड मेंशन के पास सुबह करीब 4 बजे हुई। दो सुरक्षा गार्ड, राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो रमेश सेन, ड्यूटी पर थे, तभी अंसारी उनके पास आया और शुरू में उनसे पास की एक मस्जिद का रास्ता पूछा।

पुलिस ने बताया कि अंसारी कुछ देर के लिए वहां से चला गया, लेकिन जल्द ही लौट आया। आरोप है कि उसने गार्डों में से एक से उसका धर्म पूछा और फिर एक धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया। इसके बाद वह सुरक्षा केबिन की ओर बढ़ा, जहां दूसरा गार्ड, मिश्रा, मौजूद था। आरोप है कि उसने मिश्रा से 'कलमा' पढ़ने के लिए कहा। जब गार्ड ऐसा नहीं कर पाया, तो अंसारी ने कथित तौर पर उस पर भी हमला कर दिया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं।

अस्पताल में पीड़ितों की हालत स्थिर

अधिकारियों ने बताया कि घायल हुए दोनों गार्डों को तुरंत वोकहार्ट अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

ISIS से जुड़ा सामान कथित तौर पर बरामद

इस घटना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद अंसारी के घर की तलाशी ली गई। इस तलाशी के दौरान हाथ से लिखे कुछ नोट्स बरामद हुए, जिनमें कथित तौर पर ISIS का ज़िक्र था। साथ ही, कुछ ऐसा सामान भी मिला जिसमें कट्टरपंथी सामग्री होने का संदेह है। ISIS को संबोधित करते हुए हाथ से लिखे एक नोट में—जिसे कथित तौर पर आरोपी ने ही लिखा था—उसने इस आतंकी संगठन में शामिल होने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की थी। उसने इस हमले को अपने उस लक्ष्य की ओर "पहला कदम" बताया था।

ATS "लोन वुल्फ" एंगल की जांच कर रही है

ATS सूत्रों ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी ने इस हमले को ISIS की विचारधारा से जुड़ा हुआ दिखाने की कोशिश की है। इस हमले की जांच एक "लोन वुल्फ" (अकेले आतंकी) की कार्रवाई के तौर पर की जा रही है, और यह माना जा रहा है कि दोनों पीड़ितों को जान-बूझकर निशाना बनाया गया था। अमेरिका से लौटने के बाद आरोपी अकेला रहता था

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अंसारी साइंस ग्रेजुएट है जिसने अमेरिका (US) में कई साल बिताए, जहाँ उसका परिवार अभी भी रहता है। मूल रूप से मुंबई के कुर्ला इलाके का रहने वाला, वह कुछ साल पहले अमेरिका में नौकरी न मिलने के कारण भारत लौट आया था। तब से वह मीरा रोड में अकेला रह रहा था, और साथ ही ऑनलाइन केमिस्ट्री कोचिंग दे रहा था और एक प्रोफेशनल नौकरी की तलाश कर रहा था।

ऑनलाइन कट्टरपंथ की जाँच

अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जाँच से पता चलता है कि अकेलेपन के इस दौर में वह शायद ऑनलाइन कट्टरपंथ का शिकार हो गया हो; यह एक ऐसा पहलू है जिसकी अब विस्तार से जाँच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि ऐसा लगता है कि आरोपी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चरमपंथी सामग्री के संपर्क में आया था, जिसने शायद उसे कट्टर बनाने में भूमिका निभाई हो। शुरुआती जाँच से संकेत मिलता है कि वह प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों द्वारा फैलाई गई प्रोपेगैंडा सामग्री का इस्तेमाल कर रहा था और शायद उसमें शामिल भी था। इस सामग्री में वीडियो, साहित्य और सोशल मीडिया व मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भेजे गए एन्क्रिप्टेड संदेश शामिल थे।

डिजिटल फुटप्रिंट की जाँच

जाँच ​​एजेंसियाँ आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट की जाँच कर रही हैं। इसमें उसके मोबाइल डिवाइस, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और बातचीत के रिकॉर्ड शामिल हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि वह किस हद तक ऐसी सामग्री के संपर्क में आया था, उसके कोई संभावित हैंडलर या संपर्क थे या नहीं, और क्या उसने अकेले काम किया या उसे दूर से किसी ने प्रभावित किया या निर्देश दिए। चरमपंथी विचारों को मज़बूत करने में एल्गोरिदम-आधारित सामग्री के प्रचार और बंद ऑनलाइन समूहों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।

आगे की जाँच जारी

सूत्रों ने बताया कि इस तरह के लगातार ऑनलाइन संपर्क ने शायद आरोपी की विचारधारा को आकार देने में भूमिका निभाई हो, और शायद हमले को अंजाम देने में भी इसका असर पड़ा हो। हालाँकि, कट्टरपंथ का सटीक स्तर और किसी भी बाहरी संपर्क की अभी भी जाँच की जा रही है।

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