झारखंड भारत का एक राज्य है। जो कि 15 नवम्बर 2000 में बिहार से अलग होने के बाद अस्तित्व में आया। इसकी राजधानी रॉंची है। इसके पड़ोसी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा है। झारखंड भारत में वनों के अनुपात में अग्रणी राज्य माना जाता है। झारखंड खनिज संपदा से भरा हुआ प्रदेश है। झारखंड के धनबाद जिले को कोयला की राजधानी कहा जाता है। झारखंड में 24 जिले हैं। औद्योगिक शहरों में धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर है। झारखंड में 14 लोकसभा सीट और 81 विधानसभा सीट है। Read More
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भावगत ने कहा, ‘‘हिंदू समाज को संगठित करने के अलावा संघ का कोई और काम नहीं है। यह भ्रम फैलाया जाता है कि संघ देश के सभी मामलों में हस्तक्षेप करता है। ऐसा कई लोग कहते हैं। इमरान खान भी कहते हैं। ...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नेशनलिज्म शब्द का विरोध किया है। उसकी जगह पर कई अन्य शब्दों को बोलने के लिए कहा। नेशनलिज्म शब्द को उन्होंने हिटलर करार दिया है। ...
बाबूलाल मरांडी नये झारखंड राज्य के गठन के बाद नवंबर 2000 से मार्च 2003 तक राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे थे। कुछ व्यक्तिगत कारणों से उनका पार्टी से वैमनस्य हो गया और 2006 में उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा नामक नयी पार्टी का गठन कर लिया। ...
भाजपा ने पार्टी महासचिव पी मुरलीधर राव को झारखंड विधानसभा में अपने विधायक दल का नेता चुनने के लिये पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। बयान के अनुसार, ये नियुक्तियां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा की मंजूरी से की गई है। ...
झारखंड में झाविमो(पी) के नेता बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी को इसी नज़रिये से देखा जा रहा है। दिल्ली में चुनावी हार के बाद हुई समीक्षा बैठकों से मिले संकेतों के अनुसार भाजपा नेतृत्व भविष्य में प्रदेशों में होने वाले चुनावों में, जहां संभव होगा, म ...
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा दुखद बात यह है कि राज्य में नवगठित सरकार ने इतने नृशंस हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। ...
झारखंडः भाजपा से अलग होने के बाद बाबूलाल मरांडी की छवि कमजोर नेता की होने लगी थी। चुनावों में लगातार हार के चलते उनकी पार्टी भी अस्तित्व खोती नजर आ रही थी। 2009 के बाद 2019 तक बाबूलाल मरांडी कोई चुनाव नहीं जीत पाए थे। ...
आरएसएस के निष्ठावान स्वयंसेवक और समर्पित बीजेपीई रहे बाबूलाल मरांडी ने 2006 में पार्टी से मनमुटाव के बाद झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) नाम से अपनी एक नई पार्टी बना ली थी. जिससे वे लगातार दो बार कोडरमा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने. ...