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लॉकडाउनः जीडीपी को हो सकता है 1.5 लाख करोड़ का नुकसान, SBI रिपोर्ट में खुलासा, महाराष्ट्र, एमपी और राजस्थान पर असर

By सतीश कुमार सिंह | Updated: April 23, 2021 16:32 IST

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भारतीय रिज़र्व बैंक (SBI) की आर्थिक शाखा की एक रिपोर्ट के अनुसार राज्यों में लगे लॉकडाउन से सकल घरेलू उत्पाद को करीब  1.5 लाख करोड़ (1.5 ट्रिलियन) रुपये का नुकसान हो सकता है।
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करीब 80 फीसदी हिस्सा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान का है। अकेले महाराष्ट्र में 54 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र में ही करीब 82,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, जो आगे अंकुश सख्त होने पर निश्चित रूप से और बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश में करीब 21,712 करोड़ रुपये और राजस्थान में करीब 17,237 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
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अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी बोफा सिक्योरिटीज ने सोमवार को आगाह करते हुए कहा कि भारत में राष्ट्रीय स्तर पर अगर एक महीने का ‘लॉकडाउन’ लगाया जाता है तो जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। ब्रोकरेज कंपनी ने उम्मीद जतायी है कि कोविड महामारी को फैलने से रोकने के लिये स्थानीय स्तर पर ही ‘लॉकडाउन’ लगाया जाएगा।
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बोफा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि एक महीने पहले कोविड के 35,000 मामले थे जो अब सात गुना बढ़कर 2.61 लाख से अधिक हो गये हैं। इससे जो अभी शुरुआती चरण का पुनरूद्धार था, उसके लिये जोखिम उत्पन्न हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘यह देखने की बात है कि क्या कोविड-19 की दूसरी लहर राष्ट्रीय स्तर पर ‘लॉकडाउन’ के बिना समाप्त होगी।
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राष्ट्रीय स्तर पर अगर एक महीने के लिये भी ‘लॉकडाउन’ लगाया जाता है, जीडीपी को एक से दो प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘उच्च आर्थिक लागत को देखते हुए, हमारा अनुमान है कि केंद्र और राज्य सरकारें कोविड-19 की रोकथाम से जुड़े नियमों (मास्क, उचित दूरी आदि) को कड़ाई से लागू कर, रात्रि कर्फ्यू और स्थानीय स्तर पर ‘लॉकडाउन’ के जरिये इस पर अंकुश लगाने का प्रयास करेंगी।’’
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कोविड-19 के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों के टीकाकरण की लागत 67,193 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से कुल मिलाकर राज्यों पर 46,323 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने जानकारी दी। कोविड-19 की दूसरी लहर देश में तेजी से बढ़ी है, जिसके बाद सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण का दायरा व्यापक करने की घोषणा की।
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आर्थिक शोध एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च ने शुक्रवार को वर्ष 2021- 22 के लिये भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान पहले के 10.4 प्रतिशत से घटाकर 10.1 प्रतिशत कर दिया है। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर को देखते हुये यह संशोधन किया गया है। इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि जब देश के बड़े हिस्से में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से चिकित्सा सुविधाओं पर भारी दबाव है।
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रिजर्व बैंक ने भी इस माह की शुरुआत में जारी मौद्रिक नीति की समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि 10.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। हालांकि गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस दौरान देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को वृद्धि के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी अड़चन बताया।
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ब्रोकरेज कंपनियां और विश्लेषक भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर को देखते हुये भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमानों को कम कर रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष 2020- 21 में भारत की जीडीपी दर में 7.6 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान है। इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर का आर्थिक प्रभाव इतना ज्यादा नहीं होगा जैसा कि पहली लहर का पड़ा था। इसकी वजह, पहली लहर के चरम पर पहुंचने के समय जितने मामले थे उसके मुकाबले दूसरी लहर में दैनिक मामलों की संख्या तीन गुणा तक पहुंच जाने के बावजूद लॉकडाउन स्थानीय स्तर तक ही सीमित रखा जा रहा है। (सभी फाइल फोटो)
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