नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस, डीएमके, सीएम स्टालिन सहित विपक्ष पर जमकर प्रहार किया। पीएम मोदी ने कहा कि डीएमके नेता काला कपड़ा पहन कर संसद सहित तमिलनाडु में विरोध कर रहे हैं। गांव और शहर में कहा जाता है कि जब भी कोई शुभ काम शुरू होता है तो नजर ना लग जाए। इसके लिए मां अपने बच्चों को काला टीका लगाती हैं। संसद में पीएम मोदी ने डीएमके नेता को धन्यवाद देते हुए कहा कि आप लोग नारी शक्ति विधेयक से पहले ये कपड़ा पहन कर शुभ काम किया है और इसके लिए आप सभी को तहेदिल से शुक्रगुजार हूं।
लोकसभा में तीखे व्यंग्य और नाटकीय बहस से भरे सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को अपने खास हास्य अंदाज में करारा जवाब दिया और महिला आरक्षण विधेयक पर बहस के दौरान काले कपड़े पहनने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के उद्देश्य से गठित इस ऐतिहासिक विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने देखा कि कई विपक्षी सांसद विरोध के प्रतीक के रूप में काले कपड़े पहने हुए थे। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा, "'काला टीका लगाने के लिए धन्यवाद।"
यह बुरी नजर से बचाव के लिए लगाए जाने वाले पारंपरिक 'काला टीका' का एक हल्का-फुल्का संदर्भ था। "हमारे देश में, जब भी कोई शुभ अवसर होता है, उसे बुरी नजर से बचाने के लिए 'काला टीका' लगाना प्रथा है। मैं इन शुभ विधेयकों पर आगे बढ़ने से पहले 'काला टीका' लगाने के लिए विपक्ष का आभार व्यक्त करता हूं।"
मैं मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब, सिर्फ उत्तम प्रकार की रेल, कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर, रास्ते या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े... सिर्फ इतने से विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में सबका साथ—सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या देश की नीति निर्धारण का हिस्सा बने, ये समय की मांग है।
हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कुछ भी हो, जिम्मेदार कोई भी हो। इसे हमें स्वीकार करना होगा। हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, ऐसा इसलिए नहीं हुआ।
क्योंकि तब सबने सर्वसम्मति से इसे पारित किया तो यह विषय ही नहीं रहा। वो कहती हैं कि झाड़ू कचरा वाले काम में तो हमें जोड़ देते हो, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ों और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा और लोकसभा में होती हैं। इसलिए राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, उनको ये मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25—30 साल में ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। वो सिर्फ यहां नहीं, वहां भी आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं। जो आज विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।
हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने न दें। हम भारतीय मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को एक संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति के रूप-स्वरूप को तय करने के साथ देश की दिशा और दशा भी तय करेगा।
आज हम इसे काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते। आवश्यकतानुसार उसमें समय समय पर सुधार होते और यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती होती है। राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं, और उस समय की समाज की मन स्थिति एवं नेतृत्व की क्षमता उस पल को कैप्चर कर एक राष्ट्र की अमानत बना देती हैं, एक मजबूत धरोहर तैयार करती हैं। भारत के संसदीय इतिहास में ये वैसा ही पल है।
संसद में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास आवश्यक संख्याबल नहीं है। हालांकि अन्य दलों के समर्थन हासिल करने से या उनमें से कुछ के मतदान से अनुपस्थित होने पर विधेयक का जरूरी मतों के साथ पारित होना संभव है।
लोकसभा में राजग को 293 सदस्यों का समर्थन है जो सदन का 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। सात सांसद निर्दलीय हैं, जबकि सात सांसद वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों से हैं, जिन्होंने अभी तक खुले रूप में विधेयकों का समर्थन नहीं किया है। आवश्यकता तो ये थी कि 25—30 साल पहले, जब ये विचार सामने आया तभी इसे लागू कर देते।