बिहार: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही उठने लगी है शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग
By एस पी सिन्हा | Updated: April 16, 2026 17:41 IST2026-04-16T17:40:58+5:302026-04-16T17:41:03+5:30
गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद माधव आनंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और उन्हें विश्वास है कि बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

बिहार: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही उठने लगी है शराबबंदी कानून को खत्म करने की मांग
पटना: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून को लेकर नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर अब इस कानून को खत्म करने का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। हम पार्टी के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बाद अब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी खत्म करने की खुलकर मांग की है। गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद माधव आनंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं और उन्हें विश्वास है कि बिहार विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
माधव आनंद ने कहा कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार की एक ऐतिहासिक पहल थी, लेकिन अब 10 साल बाद इसकी समीक्षा जरूरी है। उनके अनुसार, यह कानून राज्य के लिए राजस्व नुकसान का कारण बन रहा है और इसे जारी रखने के बजाय जागरूकता पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार को विकास के लिए फंड की जरूरत है, लेकिन शराबबंदी के कारण राजस्व दूसरे राज्यों में जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सदन में पहले भी उन्होंने इस कानून की समीक्षा की मांग उठाई थी और अब भी वे इसे जरूरी मानते हैं। माधव आनंद ने कहा कि शराबबंदी समाधान नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना ज्यादा प्रभावी तरीका होगा। उन्होंने कहा कि नई सरकार सम्राट चौधरी के नेतृत्व में विकास और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ेगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेगा और ‘विकसित बिहार’ तथा ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पूरा होगा। माधव आनंद ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून की वजह से राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक, “आज जरूरत है कि इस नुकसान को रोका जाए। शराबबंदी की जितनी जरूरत थी, वह पूरी हो चुकी है, लेकिन अब इसे खत्म किया जाना चाहिए।
बता दें, माधव आनंद ने इससे पहले भी विधानसभा में शराबबंदी कानून पर समीक्षा करने की बात कही थी। बता दें कि बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान बड़ी मात्रा में शराब जब्त की गई और लाखों लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन जहरीली शराब से हुई मौतों और अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क को लेकर यह कानून लगातार चर्चा में रहा है।