पटना: बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सत्ता के इस शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता जितना रोमांचक था, आगे का सफर उतना ही पथरीला नजर आता है। नीतीश कुमार ने भले ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानकर एनडीए की कमान सौंप दी हो, लेकिन 20 साल तक सुशासन बाबू की छवि के साथ राज करने वाले नीतीश कुमार की जगह लेना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। बिहार में भ्रष्टाचार एक ऐसी समस्या रही है जो सरकारें बदलने के बावजूद जड़ें जमाए बैठी है। हाल के दिनों में बड़े अधिकारियों पर हुई छापेमारी इसका प्रमाण है। ऐसे में सम्राट चौधरी से लोगों की अपेक्षाएं भी कम नहीं हैं। लोगों ने 2 दशक तक नीतीश कुमार का राज देखा है।
नीतीश कुमार ने बिहार को जंगल राज से बाहर निकाल कर नीतीश ने सुशासन कायम किया तो विकास की गंगा भी बहाई। सड़क, पुल, बिजली और पानी जैसी ढांचागत सुविधाओं से बिहार लैस हुआ है तो इसके पीछे नीतीश कुमार की सुविचारित योजनाएं रही हैं। बाद के दिनों में नीतीश कुमार भले कमजोर पड़े, लेकिन पहले टर्म में उन्होंने अपराध नियंत्रण की दिशा में जो काम किए, उससे उस दौर की पीढ़ी कभी नहीं भूलेगी। अब बिहार की बागडोर सम्राट चौधरी के हाथ में हैं। अब सम्राट के सामने अपनी काबिलियत साबित करने की बारी है। उन्हें 5 ऐसी बड़ी चुनौतियां विरासत में मिली हैं, जिन पर कायदे से उन्होंने काम कर लिया तो उनकी गिनती यूपी में अपराधियों पर नकेल कसने वाले योगी आदित्यनाथ की कतार में होने लगेगी।
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए उन्हें नरेंद्र मोदी के अंदाज में काम करना होगा। बिहार में भाजपा और आगे ले जाने की सियासी चुनौती भी उनके सामने है। जानकारों के अनुसार सम्राट चौधरी को एक ऐसा नया मैकेनिज्म तैयार करना होगा जिससे सरकारी दफ्तरों में आम आदमी का काम बिना सुविधा शुल्क के हो सके। नीतीश कुमार ने 2005 में सुशासन के नाम पर अपराध कम किया था, लेकिन आखिरी 5-6 साल में अपराध का ग्राफ फिर बढ़ गया है। लोजपा(रा) प्रमुख चिराग पासवान ने भी कहा था कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है। हत्या, लूट, महिला अपराध की घटनाएं बढ़ीं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2025 में 2,556 हत्याएं हुईं, जो 2024 की तुलना में 8.3 फीसदी कम थीं। जबकि महिला अपराध 2025 में 2,025 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए। अब तक सम्राट चौधरी गृह मंत्री थे, पुलिस और आंतरिक सुरक्षा संभाल रहे थे। लेकिन उस दौरान उनकी कोई खास उपलब्धि नहीं देखी गई। ऐसे में भाजपा शासन में जीरो टॉलरेंस नीति लाने की संभावना ज्यादा है। अगर सुधरा तो महिलाओं और आम आदमी को राहत मिलेगी और निवेश आएगा। नहीं सुधरा तो एनडीए की ‘विकास’ वाली छवि खराब होगी और विपक्ष हमला करेगा।
वहीं, बिहार में स्कूल-कॉलेज और अस्पताल भवन तो बने, लेकिन शिक्षक-डॉक्टर की कमी और विश्वविद्यालयों का हाल खस्ताहाल रहीं। पटना मेडिकल कॉलेज जैसी पुरानी संस्थाएं टॉप पर नहीं रहीं। लड़कियों की साइकिल योजना सफल रही, लेकिन उच्च शिक्षा और अच्छे डॉक्टर नहीं मिले। एनडीए में केंद्र से फंड और नीति सपोर्ट मिलेगा। वे बड़े प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करते रहे हैं। गुणवत्ता सुधरी तो बिहार का ह्यूमन कैपिटल मजबूत होगा और युवा बाहर नहीं जाएंगे। नहीं सुधरा तो अगले चुनाव में झूठे वादे का आरोप लगेगा।
उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी अपनी राजनीति की शुरुआत से ही विवादित मामलों से जूझते रहे हैं। चाहे वो लालू-राबड़ी सरकार में कम उम्र के मंत्री का मामला हो या फिर आपराधिक मुकदमा। बालिग और नाबालिग वाले मसले को लेकर आज भी वो राजद के निशाने पर हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई और डिग्री पर भी राजद ने कई बार सवाल उठाए हैं। ये तय है कि राजद उन्हें पूरे कार्यकाल में सदन से लेकर सड़क तक इसी मुद्दे पर घेरते रहेगा। ये भी कह सकते हैं कि तेजस्वी यादव के पास मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ ऐसा अस्त्र है, जिसे वो जब चाहें तब चलाते रहेंगे। ऐसे में अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के जवाब ही उन्हें विपक्ष से वार से बचाएंगे।
इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने कहा कि अब जबकि सम्राट मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो उन्हें जनता को यह बता देना चाहिए कि उन्होंने दसवीं कक्षा कब और कहां से उत्तीर्ण की? सम्राट वस्तुत: चाणक्य, आर्यभट्ट, विक्रमशिला, नालंदा जैसी ज्ञान की भूमि बिहार को चाल, चरित्र, चेहरा की बात करने वाली भाजपा का पहला उपहार हैं। पीके ने कहा कि आश्चर्य यह कि जनता को अपने मुख्यमंत्री के बारे में यह भी पता नहीं कि उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है। भाजपा ने उन पर लगे दाग पर भी कोई सफाई नहीं दी। यह नई भाजपा है, जिसमें ऐसे ही लोगों की चलती है।