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ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता और मलयालम कवि अक्कितम अच्युतन नंबूतिरी का निधन

By सतीश कुमार सिंह | Updated: October 15, 2020 19:36 IST

मलयालम कविता में आधुनिकतावाद को प्रस्तुत करने वाले कवि अक्कितम अच्युतन नंबूतिरी एक सच्चे गांधीवादी, समाज सुधारक, पत्रकार थे। वह सादगी की एक मिसाल थे। वर्ष 2019 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था।

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ठळक मुद्देकवि अक्कितम अच्युतन नंबूतिरी का बृहस्पतिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 94 वर्ष के थे।त्रिशुर के प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस लीं। आज शाम उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

त्रिशूरः ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध मलयालम कवि अक्कितम अच्युतन नंबूतिरी का बृहस्पतिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 94 वर्ष के थे।

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उम्र संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती अक्कितम का सुबह 8.10 बजे निधन हो गया। हाल ही में, उन्हें पलक्कड़ जिले के कुमारनल्लूर में उनके घर पर आयोजित एक विशेष समारोह में देश के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।

मलयालम कविता में आधुनिकतावाद को प्रस्तुत करने वाले कवि नंबूतिरी एक सच्चे गांधीवादी, समाज सुधारक, पत्रकार थे। वह सादगी की एक मिसाल थे। वर्ष 2019 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने गुरुवार को केरल के त्रिशुर के प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस लीं। आज शाम उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

अक्कितम अच्युतन नंबूतिरी युगद्रष्ट कवि थे। उन्हें कई पुरस्कार से नवाजा गया था। साहित्य अकादमी पुरस्कार, मूर्ति देवी पुरस्कार, कबीर सम्मान, वल्लतोल सम्मान समेत कई अवार्ड पा चुके थे। कविता, नाटक, उपन्यास और अनुवाद में उनकी 40 से अधिक किताबें छप चुकी हैं, उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

उन्हें 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1988 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और कबीर सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है। अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का जन्म 8 मार्च 1926 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था. बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य और कला की ओर थी, कविता के अलावा अक्कितम ने नाटक और उपन्यास भी लिखें।

उनके परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं। अक्कितम की पत्नी श्रीदेवी अंतरजनम का निधन पिछले साल 85 साल की उम्र में हो गया था। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उम्र संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती अक्कितम का सुबह 8 बज कर 10 मिनट पर निधन हो गया। अक्कितम के नाम से लोकप्रिय कवि की ‘इरुपथम नूतांदिंते इतिहासम’ (20 वीं शताब्दी की महाकाव्य) को मलयालम साहित्य के पहले आधुनिकतावादी काव्य संग्रहों में से एक माना जाता है।

उन्होंने लगभग 45 पुस्तकों का लेखन किया, जिनमें ‘बालीदर्शनम्’, 'अरंगेट्टम', 'निमिषा क्षेत्रम', 'इदिन्जू पोलिंजा लोकम', 'अमृता घटिका', और 'कालीकोटिलिल' सहित कई काव्यशास्त्र, नाटक और लघु कथाएँ शामिल हैं। अक्कितम को 2019 में देश के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। वह मलयालम साहित्य के लिए यह पुरस्कार जीतने वाले छठे लेखक हैं। कोविड-19 की वजह से हाल ही में, पलक्कड़ जिले के कुमारनल्लूर में उनके घर पर आयोजित एक विशेष समारोह में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

उन्हें पद्मश्री, एझुथाचन पुरस्कार, केंद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार, कविता के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, ओडाक्कुझल पुरस्कार, वल्लथोल पुरस्कार और वायलर पुरस्कार जैसे कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं। 18 मार्च, 1926 को एक पारंपरिक नंबूदरी परिवार में जन्मे अक्कितम एक सच्चे गांधीवादी, समाज सुधारक और पत्रकार थे। उन्होंने 1956 में कोझीकोड में आकाशवाणी में काम करने से पहले विभिन्न पत्रिकाओं में एक संपादक के रूप में काम किया था।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अक्कितम के निधन पर दुख व्यक्त किया। खान ने कहा कि कवि अक्कितम का निधन भारत के साहित्य जगत और मलयालम कविता के लिए एक क्षति है। विजयन ने कहा कि अक्कितम एक महान कवि थे जो उदात्त मानवीय प्रेम के साथ खड़े थे।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता, रमेश चेन्नितला ने कवि के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके साहित्यिक कार्य मानवता के सौंदर्य से भरे हुए हैं। अक्कितम के पार्थिव शरीर को यहां साहित्य अकादमी हॉल में कुछ समय के लिए रखा गया था, ताकि लोग उनके आखिरी दर्शन कर सकें। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को शाम में अंतिम संस्कार के लिए पलक्कड़ के कुमारनल्लूर ले जाया गया।

टॅग्स :केरलपिनाराई विजयन
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